मुक्‍त व्‍यापार समझौते में रोजगार के अवसर तथा उनसे जुड़ी चुनौतियाँ

Afeias
16 May 2026
A+ A-

To Download Click Here.

पिछले दिनों भारत ने न्‍यूजीलैंड के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता किया है। इससे पहले यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ अन्‍य देशों के साथ भी एफटीए हो चुका है। इससे भारतीय नागरिकों के लिए वैश्विक नागरिक बनने का मार्ग खुलता है। एफटीए की असली ताकत माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप में है। नई दिल्‍ली में स्‍थापित लीगल गेटवे आफिस इस दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है।

  • अब भारतीय प्रतिभा का प्रवास अनौपचारिक नहीं, बल्कि संस्‍थागत और संरक्षित होगा। ईयू की रोजगार दर 76.3% है। वहाँ 10 लाख से ज्‍यादा स्‍वास्‍थ्‍य पेशेवरों की तत्‍काल आवश्‍यकता है, जिसमें नर्स, केयरगिवर व फिजियोथेरेपिस्‍ट शामिल हैं।
  • ई.यू. में ‘चीन प्‍लस वन नीति’ के कारण साफ्टवेयर इंजीनियर, डाटा साइंस और साइबर सुरक्षा में नए अवसर हैं।
  • 2035 तक ईयू के ‘नेट जीरो’ लक्ष्‍य के कारण सोलर टेक्‍नीशियन, विंड टर्बाइन विशेषज्ञ और इलेक्ट्रिक व्‍हीकल इंजीनियरों की भी आवश्‍यकता है।
  • केवल उच्‍च शिक्षित नहीं, बल्कि लाजिस्टिक्‍स, निर्माण, होटल, वेयरहाउस आपरेशंस, स्‍मार्ट इलेक्‍ट्रीशियन एवं कृषि प्रसंस्‍करण के लिए भी युवाओं की आवयकता है।

एफटीए से मिलने वाले रोजगार में बाधा –

  • भारत में स्‍नातक युवाओं में से 8.25% ही योग्‍यता के अनुसार कार्य कर रहे हैं, जबकि 50% अपनी योग्‍यता से कम का काम कर रहे हैं।
  • हिंदी भाषी राज्‍यों में अंग्रेजी के साथ ही जर्मन, फ्रेंच व स्‍पेनिश भाषा का ज्ञान नगण्‍य है।
  • हमारे आईटीआई और विश्‍वविद्यालयों के प्रमाण-पत्र यूरोपीय मानकों से मेल नहीं खाते। वस्तुतः उन्‍हें श्रमिक नहीं बल्कि विशेषज्ञ चाहिए।

आगे की राह –

  • नीतिगत स्‍तर पर हमें मात्रा की बजाय गुणवत्ता को मूलमंत्र बनाना होगा। प्रशिक्षण संस्‍थानों को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के प्रशिक्षकों, उद्योग संबंद्ध पाठ्यक्रमों और वैश्विक प्रमाण-पत्रों को अपनाना होगा।
  • बिहार का लैंग्‍वेज लेबोरेटरी मॉडल जिसमें अरबी, अंग्रेजी, जर्मन व जापानी सिखाई जाती है, इसे अपनाना चाहिए। कम से कम एक यूरोपीय भाषा आनी चाहिए और स्‍नातक होना चाहिए।
  • यूरोपीय कार्य संस्‍कृति में संवाद, समयबद्धता और सांस्‍कृतिक संवेदनशीलता भी समझना आवश्‍यक है। स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जो वाराणसी व भुवनेश्‍वर में स्‍थापित हो चुके हैं, इस दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है।
  • डिजिटल स्किल पासपोर्ट से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा करियर सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।
  • इसे ब्रेन ड्रेन नहीं बल्कि ब्रेन सर्कुलेशन माना जाना चाहिए।

*****