रोबोट से बढ़ता खतरा

Afeias
15 May 2026
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10 फरवरी, 1996 को तब दुनिया बहुत बदल गई थी, जब आईबीएम के डीपब्‍लू कंप्‍यूटर ने शतरंज के खेल में गैरी कास्‍पारीस को हरा दिया था। हाल ही में ऐसा ही फिर से हुआ है। बीजिंग में एक हूमनॉइड रोबोट ने पुरुषों के हॉफ मैराथन रिकार्ड को तोड़ दिया है।

इंसान जैसे दिखने वाली रोबोट के प्रति हमारा आकर्षण अलग ही है। लेकिन हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि एक ऑटोनॉमस इंसानी आकार का रोबोट, जो हमसे बेहतर समझ दिखाता है, बहुत खतरनाक हो सकता है। इसकी निर्माता कंपनियां बहुत बड़े स्‍तर पर इनको बनाने की सोच रही है। मॉर्गन स्‍टेनली का अनमान है कि 2050 तक एक अरब से ज्‍यादा ह्यूमनॉइड रोबोट काम पर होंगे।

समस्‍या यह है कि अगर कभी न थकने वाले ये रोबोट ब्‍लू कॉलर जॉब की जगह ले लें, तो ज्‍यादातर इंसान क्‍या करेंगे? जब चेक लेखक कारेल कैपेक ने 1920 में ‘रोबोट’ शब्‍द बनाया था, तब उन्‍हें चिंता थी कि औद्योगीकरण इंसानों को मशीन बना रहा है। अब डर यह है कि मशीनें इंसानों को बेकार कर देंगी। अभी तक उम्‍मीद थी कि नर्सिंग और देखभाल जैसे काम इंसान ही कर सकते हैं लेकिन 2016 में ऑड्रे हेपबर्न नायिका जैसी एक रोबोट सोफिया बनाई गई थी। इसके चेहरे के लिए ऐसी त्‍वचा तैयार की गई थी, जो 62 अभिव्‍यक्तियां कर सकती थीं।

कई रोबोट ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो हर इंसानी काम कर सकते हैं। ए आई के साथ अब रोबोट भी अधिक कौशल वाले बन रहे हैं। उनकी यह तेज गति हमारे लिए अस्तित्‍व का संकट पैदा कर सकती है।

द टाइम्‍स ऑफ इंडियामें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित- 21/04/2026