जन विश्वास 2.0
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हाल ही में संसद ने जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। यह सरकार की सोची-समझी और आगे की सोच वाली नीति है। इससे जुड़े कुछ मुख्य बिन्दु –
- यह विधेयक 23 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 80 केन्द्रीय अधिनियमों में संशोधन करता है।
- इसके तहत नागरिकों और व्यवसायों पर बोझ कम करने के लिए छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर नागरिक दंड या सिविल पेनल्टी में बदल दिया गया है। इससे ‘विश्वास आधारित शासन’ को मजबूती मिलने की संभावना है।
- इससे मुकदमेबाजी कम होनी चाहिए। यह कुछ उल्लंघनों के लिए कारावास को जुर्माने या चेतावनी तक सीमित कर देता है। इससे व्यवसायों और व्यक्तियों को मामूली त्रुटियों के लिए कठोर दंड से बचाया जा सकता है।
- इस विधेयक का लाभ मुख्यत: माइक्रो, लघु और मझोले उद्यमों को मिलना चाहिए, जो ज्यादा अनुपालन के बोझ का सामना कर रहे हैं।
- ये सुधार न्यायपालिका के बोझ को कम कर सकते हैं। फिलहाल न्यायालयों में लगभग 5 करोड़ मामले लंबित हैं। इनमें से कई छोटे प्रक्रियात्मक या तकनीकी त्रुटियों से जुड़े हुए हैं। इन्हें आपराधिक मामलों से हटाकर न्यायिक बोझ को कम किया जा सकता है।
कुल-मिलाकर जन विश्वास 2.0 नियामक सोच में एक बड़े बदलाव को दिखाता है। यह अपराधीकरण के बदले भरोसा, समानता, पारदर्शिता और निवेश आधारित वातावरण तैयार करने वाला है।
समाचार पत्रों पर आधारित – 19/04/2026