विकास की ओर माओवाद मुक्त क्षेत्र
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मार्च 2026 का दिन भारतीय इतिहास में सशस्त्र माओवाद के खात्मे के रूप में दर्ज हो चुका है। यह लोकतंत्र, सुशासन और विकास की व्यापक सोच की विजय है। इससे अब बस्तर को एक नई दिशा मिल रही है। आइये, जानते हैं कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को किस प्रकार हासिल किया गया है –
- केन्द्र द्वारा माओवाद के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ तथा ‘विकास आधारित समाधान’ की नीति अपनाई गई।
- सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के साथ स्थानीय लोगों का सहयोग मिला। वहीं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न केवल रणनीतिक रूप से ही, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों का मनोबल बढ़ाया।
- सरकार ने संवाद और पुनर्वास को अपनी रणनीति का केन्द्र बनाया।। जो लोग हिंसा छोड़कर मुख्य धारा में शामिल होना चाहते थे, उन्हें सड़क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाऍं भी दी गई।
- जो लोग सिफ हिंसा की भाषा समझते हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की गई। सुधाकर, वसवराज जैसे शीर्ष माओवादियों को न्यूट्रलाइज करने से माओवाद की कमर टूट गई।
- सुरक्षा कैंपों के 10 कि.मी. के दायरे में आने वाले 525 गाँवों में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 विभागों के माध्यम से 25 हितग्राही मूलक और 18 सामुदायिक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुँचाया जा रहा है।
- हिंसा छोड़कर आए लोगों को आर्थिक, सहायता, आवास, भूमि, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर भी दिया जा रहा है। इसी क्रम में 15 हजार प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत किये गए हैं।
- बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम में लाखों की संख्या में लोगों की भागीदारी ने जन जातीय संस्कृति को एकसूत्र में पिरोया है।
इस शांति के निरंतरता के लिए किये जाने वाले प्रयास –
- यहाँ सड़क नेटवर्क की बेहतरी पर काम किया जाएगा। रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस वे, जगदलपुर-रावघाट रेल्वे मार्ग और हवाई सेवाओं के विस्तार से बस्तर देश की मुख्यधारा से जुड़ेगा। इससे पर्यटन व रोजगार भी बढ़ेगा।
- अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी और गीदम में मेडिकल कॉलेज जैसे प्रोजेक्ट इस क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में मील के पत्थर साबित होंगे।
- सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से किसानों को सशक्त किया जा रहा है।
- अब समग्र विकास के लिए नियद नेल्ला नार 2.0 पर काम किया जाएगा, जिसमें 7 की जगह अब 10 जिले शामिल होंगे।
- बस्तर मुन्ने (अग्रणी गाँव) पहल के तहत ग्राम पंचायतों में शिविर लगाकर जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
- बस्तर जिले में 85% लोगों की आय 15000 से कम है। इसे केन्द्र की मदद से अगले तीन वर्षों में 30000 करने की कोशिश की जाएगी। इसमें एनआरएलएम, सहकारी समितियाँ, कृषक उत्पादक संगठन, वन-धन विकास केन्द्र एवं कौशल विकास की अहम् भूमिका होगी।
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