डिजिटल पर भारी पेपर
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कुछ समय से दुनिया भर के न्यूरोसांइटिस्ट इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि स्क्रीन पर पढ़ना अच्छा है, या किताबों से पढ़ना। शोध के कुछ नतीजें –
- पढ़ने और याद रखने के लिए किताबी या भौतिक माध्यम सर्वश्रेष्ठ होता है।
- स्पेन के एक विश्वविद्यालय ने 4.5 लाख प्रतिभागियों के साथ किए गए 25 अध्ययनों की समीक्षा की है। नतीजा यह निकला है कि 10 घंटे पेपर सामग्री पढ़ने से जो समझ बढ़ती है, वह डिजिटल डिवाइस की तुलना में छह से आठ गुना ज्यादा होती है।
- इसका कारण है कि ई-रीडर या ऑडियो बुक सुनने वाले उतना फोकस नहीं करते हैं, जितना कि पेपर के माध्यम से पढ़ने वाले।
- फोन पर पढ़ने से दिमाग को लिखे हुए को प्रोसेस करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यह दिमाग पर दोहरा बोझ डालता है। दिमाग को सीक्वेंस को याद रखते हुए आगे बढ़ना होता है। तभी लिखे हुए का मतलब निकलता है। ई-रीडिंग या ऑडियो में यह सीक्वेंस उतना स्पष्ट याद नहीं रह पाता, जितना पढ़ने पर रहता है।
- बात गति की भी है। प्रत्येक व्यक्ति की पढ़ने और पढ़े हुए को समझने की गति अलग होती है। किताब या पेपर को पढ़ते हुए अपनी गति और समझ का जो तालमेल बन पाता है, वह डिजिटल के साथ नहीं बन पाता है। लेकिन अपवाद हर जगह हो सकते हैं।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 28 मार्च 2026