पैक्स सिलिका और भारत

Afeias
20 Feb 2026
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जैस-जैसे उन्नत प्रौद्योगिकी पर वैश्विक सहयोग बढ़ रहा है, भारत भी इनसे जुड़े नियमों से अपने को अलग नहीं रख सकता। अमेरिका की ऐसी ही एक पहल है, पैक्स सिलिका। इससे जुड़ने के लिए भारत को भी आमंत्रित किया गया है।

पैक्स सिलिका क्या है –

यह अमेरिका के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, एआई, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत विनिर्माण, रसद और संबंधित ऊर्जा एवं डेटा अवसंरचना आदि को सदस्य देशों के बीच सुरक्षित रूप से साझा और समन्वित करना है। अंततः यह विनिर्माण प्रौद्योगिकी में चीन पर निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखती है। कई देश जैसे, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, यूएई, यूके आदि इसमें शामिल हो चुके हैं।

भारत का रुख –

  • भारत ने फरवरी, 2026 के अंत तक पैक्स सिलिका में शामिल होने की स्वीकृति दे दी है।
  • समझौते में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों, अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला पर कर कम करने या कुछ पर कर हटाने को लेकर अपनी मंजूरी दे दी है।
  • पैक्स सिलिका के सदस्य देशों से जुड़कर भारत एक सामूहिक सुरक्षा जाल और लाभ में शामिल हो जायेगा। इसका परिणाम यूएई-भारत-आस्ट्रेलिया क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप, ऑस्ट्रेलिया-कनाड़ा-इंडिया टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन पार्टनरशिप तथा इंडिया-फ्रांस जैसे सहयोग में देखने को मिलता है।
  • इससे भारत जैसे देश को नई प्रौद्योगिकियों से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के नियम और मानदण्डों को तय करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है। अतः भारत को इस पहल में अपनी भागीदारी से उन आवाजों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, जिन्हें अक्सर छोड़ दिया जाता है।

‘द इकॉनॉमिक टाइम्समें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 27 जनवरी, 2026