खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध
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संयुक्त अरब अमीरात और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने हाल ही में दिल्ली का लगभग दो घंटे का दौरा किया है। यद्यपि उनकी मुलाकात सिर्फ प्रधानमंत्री के साथ हुई, लेकिन यह कई दूरगामी परिणामों के साथ खत्म हुई।
कुछ बिंदु –
- यूनियन ऑफ अरब बैंक भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर, दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन तथा सातवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।
- हाल ही में आए शेख नाहयान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना यानि 200 अरब डॉलर करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- हालांकि, बड़ी घोषणा भारत-यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप के लिए एक समझौता करने की है। इस पर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया करीब से नजर रखेंगे।
- यूएई के शेख का अचानक भारत दौरा इसलिए भी अधिक महत्व रखता है, क्योंकि सउदी अरब और यूएई का संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक प्रकार का शीत युद्ध शुरू हो चुका है। इसका अर्थ है कि दोनों के लिए आंतरिक और बाहरी सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। सुरक्षा समझौते को सउदी और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य-समझौते का काउंटर माना जा रहा है। यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि भारत सरकार को न केवल यूएई, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ संबंधों को भी ध्यान में रखना चाहिए, जहाँ लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं।
- गल्फ कार्पोरेशन-काउंसिल या जीसीसी एक बड़ा ऊर्जा क्षेत्र है। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर नाराजगी दिखाई है। इन स्थितियों में ईरान का चाबहार पोर्ट, इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और इंडिया-मिडिल ईस्ट यूरोप आर्थिक गलियारा योजना सब खतरे में पड़ गए हैं। अतः इस क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात से भारत के रिश्ते मजबूत होना महत्वपूर्ण हो जाता है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 21 जनवरी 2026