पड़ोसी पाकिस्तान में सेना का शासन
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हाल ही में पाकिस्तान में 27वां संविधान संशोधन किया गया है। अभी तक पूरी दुनिया में यह हवा फैली हुई थी कि पाकिस्तान की सेना ही वहाँ की लोकतांत्रिक सरकार चलती है। इस संशोधन से ऐसी अफवाह को सच बना दिया गया है। इसके साथ ही कुछ अन्य पुनर्गठन भी किए गए हैं, जिन्हें जानना जरूरी है।
कुछ बिंदु –
- सरकार ने पाकिस्तानी सेना के चीफ जनरल मुनीर को फील्ड मार्शल के रैंक पर पदोन्नत कर दिया है। जनरल अयूब खान के बाद किसी जनरल को यह फाइव स्टार रैंक दिया गया है। इसका अर्थ है कि जनरल मुनीर पर अब कोई भी आपराधिक केस नहीं किया जा सकता है। ऐसी सुरक्षा वहां के राष्ट्रपति को भी दी जाती है। ऐसे जनरल को सिर्फ अनुच्छेद 47 के तहत महाभियोग से ही हटाया जा सकता है।
- संशोधन में सेना कमांड और न्याय तंत्र को भी पुनर्गठित किया गया है। यह अनुच्छेद 243 को पुनर्गठित करता है। इसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद निर्मित किया गया है। आर्मी चीफ ही इस पद को संभालेंगे।
- कुल मिलाकर, जनरल मुनीर के पास सत्ता का केंद्रीकरण कर दिया गया है।
इस संशोधन से संविधान में संशोधन करने का अधिकार भी उच्च्तम न्यायाल से छीन लिया गया है।
पाकिस्तान और अन्य देशों में इस प्रकार के सैनिक शासन का इतिहास बताता है कि सामाजिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक नेताओं ने ताकतवर जनरलों का विरोध किया है और तख्ता पलटा है। आज कमजोर सरकार और जेल में विपक्ष के नेताओं के साथ भले ही जनरल ने अपनी शक्ति बढ़ा ली हो, लेकिन यह जल्द ही उलट सकता है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 18 नवंबर, 2025
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