वाणिज्य व व्यापार में भारत की उपलब्धियाँ
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2025 के निवेश, व्यापार, रोजगार व ईज ऑफ लिविंग को लेकर लिए गए निर्णय के कारण 2026 भारत के वाणिज्य और उद्योग परिदृश्य में नया विश्वास और आशावाद लेकर आया है।
- भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स हैं। इससे आर्थिक विकास व रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है तथा गरीबों के जीवन स्तर में भी सुधार होता है।
- वैश्विक अनिश्चतताओं के बावजूद 2024-25 में भारत का कुल निर्यात 6% बढ़कर रिकार्ड 825.25 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। निर्यातकों के समर्थन के लिए 25,060 करोड़ रुपये का निर्यात प्रोत्साहन मिशन शुरू किया गया है।
- जन विश्वास और रिपीलिंग एंड एमेंडमेड एक्ट 2025 के तहत बहुत से पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है, ताकि भारत की कानूनी व्यवस्था आधुनिक मानकों के अनुरूप हो तथा व्यापार आसान हो।
- शिपिंग व पोर्टस से जुड़े 5 ऐतिहासिक विधेयकों से दस्तावेजीकरण आसान हुआ है। विवाद निपटान भी सरल हुआ है। लाजिस्टिक लागत में कमी आई है। इससे छोटे व्यापारियों, निर्यातकों तथा स्टार्टअप्स को नई उड़ान मिलती है।
- भारत ने युनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड, नार्वे, आइसलैंड, लिंकेस्टाइन, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। इन समझौतों से किसानों, युवाओं, महिलाओं को लाभ मिलेगा। भारत में बाजार को इन समझौतों के तहत संतुलित व चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। इसीलिए कृषि व डेयरी सेक्टर को संरक्षण प्रदान किया गया है।
- एफ्टा (यूरोपीय मुक्त व्यापार समझौता) के तहत भारत में न्यूजीलैंड ने 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इससे कृषि, डेयरी, एमएसएमई, शिक्षा एवं खेल में समावेशी व व्यापक विकास किया जाएगा।
- 2024-25 तक के पिछले 11 वर्षों में 748 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जो उससे पहले के 11 वर्षों से ढ़ाई गुना ज्यादा था।
- हम जापान को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं तथा जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।
- 4 आधुनिक श्रम संहिताओं को लागु किया गया, जिसका उद्देश्य उचित वेतन, समय पर भुगतान एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- जीएसटी में सुधार किया गया है। इससे घरों, एमएसएमई, किसानों और श्रम प्रधान क्षेत्रों पर बोझ कम होगा।
- नीति-आयोग के एक सदस्य राजीव गौबा के नेतृत्व में एक पैनल व्यापक सुधारों का अध्ययन कर रहा है।
भारत प्रतिस्पर्धी व्यापार, नवोन्मेषी उद्योग और एक मजबूत आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के माध्यम से विकसित भारत का निर्माण करेगा। भारत के निर्यातकों, निर्माताओं, किसानों और सेवा प्रदाताओं की सफलता ही राष्ट्र की सफलता है। भारत सुधारों व स्पष्ट वैश्विक रणनीति के साथ अपने भविष्य को आकार दे रहा है।
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