उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई सीरीज के लाभ
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हाल ही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स (सीपीआई) की नई श्रृंखला जारी की गई है। यह पिछली सीरीज की कई कमियों को दूर करती है। इसका बेस ईयर 2024 है। पिछली सीरीज का बेस ईयर 2012 था। पिछले एक दशक में भारत का उपभोग पैटर्न और पारिवारिक खर्च का तरीका काफी बदल गया है। कुछ बिंदुओं में इसे देखते हैं –
- अब देश के 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता है। इसमें परिवारों को खाने पर कम खर्च करने की जरूरत होती है। अतः सीपीआई में खाने का वेटेज पहले के 45.86% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है।
- सूचकांक की सूची को बढ़ा दिया गया है। इसमें ज्यादा सामान और सेवाओं को शामिल किया गया है। भारत की अर्थव्यवस्था की औसत वृद्धि दर की तुलना में सेवा-अर्थव्यवस्था ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यहाँ कीमतों का स्तर एक जरूरी कारक बनता जा रहा है।
- सूचकांक में देशभर के ज्यादा मार्केट प्लेस से भी डेटा इकट्ठा किया गया है। पहली बार इसमें 12 ऑनलाइन मार्केट शामिल किए गए हैं।
- भारत में खाद्य सामग्री की कीमतें, आपूर्ति और मौसम के उतार-चढ़ाव के साथ घटती-बढ़ती रहती हैं। अगर सूचकांक में इन कीमतों का सटीक अंदाजा लग सके, तो बजट और अधिक सटीक बन सकता है। सूचकांक में खाद्य सामग्री के सही वेटेज से महंगाई आधारित भत्ता और राहत देने में सरकार को आसानी हो सकती है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 14 फरवरी 2026