श्रमिकों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य लाभ पाने की लागत ज्‍यादा है

Afeias
10 Jun 2026
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  • हाल ही में केन्‍द्रीय श्रम मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह नई श्रम संहिता में मौजूदा प्रावधान के अनुसार 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के श्रमिकों को सालाना निशुल्‍क स्वास्थ्य परीक्षण सुविधा देगा।
  • यह कार्यक्रम एम्‍प्‍लॉइज स्‍टेट इंश्‍योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) के जरिए लागू किया जाएगा। खतरनाक स्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए चेकअप जरूरी होगा। बीमार पाए जाने पर उन्‍हें ईएसआई अस्‍पतालों में नि:शुल्‍क ईलाज दिया जाएगा।
  • भारत में पहले से ही फैक्‍टरीज एक्‍ट (1948), ईएसआई एक्‍ट (1948), और ऑक्‍यूपेशनल सेफ्टी हेल्‍थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड( 2020) कर्मचारियों के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े हुए कानून हैं।
  • विडंबना यह है कि सरकार की यह पहल अच्‍छी है। लेकिन इसकी सफलता की कोई गारंटी नहीं है। अभी 94 करोड़ श्रमिक या कर्मियों में से केवल 31 करोड़ ही श्रम पोर्टल पर हैं।
  • ईएसआईसी के साथ इसका एकीकरण शुरुआती स्‍तर पर है। फिलहाल कमियां भी हैं।
  • महिलाओं के चेकअप के लिए ईएसआई में अलग मेडिकल स्‍टाफ नहीं है। ज्‍यादातर पुरुष ही स्‍टाफ में हैं।
  • यह कार्यक्रम स्‍वास्‍थ्‍य लाभ पाने के अवसर बदलने पर बढ़ी लागत को कवर नहीं करता है। एक अस्‍पताल में कोई सुविधा न होने पर मरीज को दूसरे सेंटर में रेफर किया जाता है। इससे समय और लागत बढ़ जाती है।
  • कार्यक्रम में डायबिटीज और हायपरटेंशन जैसी गैर-संक्रामक बिमारियों पर फोकस है। श्रमिकों को तीव्र गर्मी या सर्दी से होने वाली और सफाई कर्मियों में फैलने वाली बीमारियों पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं है।
  • कार्यक्रम में टीकाकरण को जरूरी नहीं बनाया गया है।
  • कर्मचारियों को चेकअप में लगे समय के लिए कोई टोकन व्‍यवस्‍था दी जानी चाहिए। या फिर उन्‍हें मोबाइल चेकअप यूनिट की सुविधा दी जानी चाहिए। सिटम को सही तरीके से चलाने पर ही कार्यक्रम के सफल होने की उम्‍मीद है।

फिलहाल, श्रम पोर्टल पर पंजीकृत कर्मियों को जब यह सुविधा मिलने लगेगी, तो इससे छूटे हुए लोग पंजीकरण के लिए प्रोत्‍साहित होंगे। लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार से भारत का सार्वभौमिक स्‍वास्‍थ्‍य मंच पर स्‍तर सुधरेगा। उत्‍पादकता और खुशहाली भी बढ़ेगी।

(हिन्‍दूमें प्रकाशित 11/05/2026 के संपादकीय पर आधारित)