शहरों का रखरखाव कहीं से स्मार्ट नहीं

Afeias
21 Jan 2026
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हाल ही में इंदौर में फैली दूषित पानी की समस्या ने शहरों की रैंकिंग और शानदार स्कोरबोर्ड पर प्रश्न उठाए हैं। इंदौर एक ऐसा शहर है, जिसे बार-बार देश में स्वच्छतम शहर का तमगा मिलता रहा है। अगर वहाँ ऐसा हो सकता है, तो बाकी शहरों के रखरखाव और प्रबंधन पर कई सवाल उठने चाहिए।

कुछ बिंदु –

  • शहरी प्रशासन में कई संकट चल रहे हैं। बिना संशोधित सीवेज का दोबारा इस्तेमाल हो रहा है। कचरे का बढ़ता ढेर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। बुनियादी ढांचे की बुरी हालत, घटिया सड़कें, खुले मैनहोल, सड़कों पर कचरे के ढेर, अस्त-व्यस्त मकानों और दुकानों का जाल, प्रबंधन और रखरखाव के नाम पर कोताही, सड़कों की मनचाही खुदाई शहरी जीवन के स्तर को बदहाल कर रही है। नियंत्रक और महालेखापरीक्षक ने 2019 में इंदौर के जल प्रबंधन पर गंभीर चिंता जताई थी। जल-प्रदूषण का खतरा भी बताया था, लेकिन कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए।
  • इस शहरी तंत्र को ठीक करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र, असली जवाबदेही, नियमित रखरखाव तथा अपग्रेड और ऐसे प्रशासन की जरूरत है, जो नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखे। शहरी निकायों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों को साफ पानी, साफ हवा, कचरा-प्रबंधन और सुरक्षित बुनियादी ढांचा प्रदान करें।

शहरों के स्मार्ट प्रबंधन के बिना, स्मार्ट शहर नहीं मिल सकते हैं।

‘द इकॉनॉमिक टाइम्समें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 6 जनवरी, 2026