सरकार, निजी-छोटे व बड़े उद्यमों का नवाचार पर विचार

Afeias
12 Sep 2026
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इस समय भारत को लेकर निराशजनक माहौल बनाया जा रहा है कि हम आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में पीछे छूट रहे हैं और कुशल कर्मचारियों के आधार पर चलने वाली कंपनियों पर इसका बहुत असर पडे़गा। साथ ही यह भी कहा जाता है कि भारत नवाचार के क्षेत्र में बहुत पीछे है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी भंडारण, जैविक उत्पाद, हुयुमनाइड रोबोट और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत काफी पीछे है।

सरकार द्वारा नवाचार के प्रयास –

  • भारत में सरकार द्वारा सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 0.65% ही नवाचार पर खर्च किया जाता है। जबकि अधिकांश देश 2.5 या 3% से भी अधिक खर्च करते हैं। पर हमारी कुछ उपलब्धियां ऐसी हैं, जिन पर हम गर्व कर सकते है, जिसमें सरकार की भी भूमिका रही है।
  • भारत ने स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी बनाई है। ऐसा केवल 4 देश ही कर पाए हैं।
  • अग्नि-6 वास्तव में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। अंतरिक्ष प्रक्षेपण और ग्रहों से जुड़े अभियान भी हमारे विश्वस्तरीय हैं।
  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचा भी हमारी बड़ी उपलब्धि हैं।

इन परियोजनाओं के लिए सरकार ने पूंजी दी। इनकी सफलता में दशकों लगे और ये हमारी प्राथमिकता में भी थीं।

निजी क्षेत्र के छोटे उद्योगों में नवाचार –

  • क्या हम यह कह सकते हैं कि कमी सरकारी नहीं निजी क्षेत्र के नवाचार संबंधी विचारों में है? भारत में शोध का 60% सरकार देती है। जबकि अन्य देशों में यह व्यय निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता है।
  • वेंचर कैपिटल निवेशकों से बात करने पर पता चलता है कि कई डीप टेक फंड शुरू हो गये हैं।
  • कई छोटी सूचीबद्ध कंपनियाँ पूंजीगत निवेश व कारोबार बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

निजी क्षेत्र के बड़े उद्योगों में नवाचार –

  • वास्तविक समस्या इन्हीं क्षेत्रों की है, जिनमें शोध की सबसे ज्यादा कमी दिखती है। इनमें दवाओं का उद्योग अपवाद स्वरूप है। आइए, जानते हैं कि ये कंपनियाँ पीछे क्यों है?
  • बड़ी कंपनियाँ अधिक लाभ व ज्यादा पूंजीगत रिटर्न के बारे में ज्यादा ध्यान देती हैं। शोध व विकास पर खर्च उन्हें अल्पकालीन हानि दिखाई देती है, जिसका असर उनके शेयरों पर भी पड़ेगा। पर यदि आरऐंडडी पर होने वाले निवेश की स्पष्ट जानकारी निवेशकों को दी जाए, तो उनका समर्थन मिलेगा।
  • बड़ी कंपनियों की बाजार पर पकड़ व बैलेंससीट पहले से ही मजबूत होती है। इसीलिए आगे बढ़ने के लिए उन पर नवाचार का दबाव नहीं होता।
  • देश की बड़ी कंपनिया इस समय देश के आधारभूत ढांचे और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश करके अच्छा लाभ कमा रही हैं।
  • जब कंपनी संस्थापक या उसके परिवार के सदस्य संभालते हैं, तो वे दूरदृष्टि के तहत नवाचार पर ध्यान देते हैं। पर नई पीढ़ी का ध्यान फैमिली आफिस जैसे निवेश प्रबंधन की और ज्यादा होता है। इसीलिए प्रबंधन को नवाचार प्रोत्साहन के लिए उन्हें अधिक हिस्सेदारी आधारित प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए।
  • भारत की ऐसी कोई कंपनी नहीं है, जिससे नवाचार के क्षेत्र में प्रेरणा ली जा सके या जिसकी वैश्विक स्तर पर बड़ी हिस्सेदारी हो। यद्यपि सूचना प्रौद्योगिकी की हमारी कंपनियाँ दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शामिल हुईं, पर उन्होंने आगे निवेश करने की बजाय लाभांश को लौटाना उचित समझा।

आगे की राह –

  • हमें निजी उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ानी चाहिए। नए उद्यमों, स्टार्टअप और विदेशी कंपनियों को बाजार में प्रवेश के अधिक अवसर मिले।
  • कारोबार शुरू करना और इसका परिचालन सुगम बनाया जाए। इससे बड़ी कंपनियाँ खतरा महसूस कर नवाचार के लिए कदम उठाएंगी।
  • भारत में कोई ऐसा सफल शोध हो, जिसकी आमदनी ही अरबों डॉलर हो। इससे कार्पोरेट जगत को नवाचार में निवेश का महत्व समझ आएगा।
  • सरकार को दोष देने की बजाय कंपनियाँ अपना आकलन स्वयं करें।

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