सम्मानजनक मृत्यु की दिशा में
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यदि सम्मानपूर्वक जीना मानव की एक बुनियादी इच्छा है, तो सम्मानपूर्वक मृत्यु भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिर भी इच्छामृत्यु से संबंधित घटनाक्रम सार्वजनिक और संस्थागत सोच में बदलाव की ओर इशारा करते हैं। मुंबई के एक अस्पताल में ‘लिविंग विल क्लिनिक’ की शुरुआत हुई है। ब्रिटेन की संसद ने असाध्य रूप से बीमार रोगियों के लिए सहायता प्राप्त मृत्यु को वैध बनाने के लिए मतदान हुआ है।
कुछ बिंदु –
- भारत में, लिविंग विल को पहली बार 2018 में उच्चतम न्यायालय के ‘कॉमन कॉज बनाम भारत संघ‘ मामले में दिए गए निर्णय में कानूनी समर्थन मिला है। इसने अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक मृत्यु के अधिकार को माना है। यह स्वीकार 2011 के अरूणा शानबाग मामले में न्यायालय से जो निष्क्रिय इच्छामृत्यु को मान्यता दी थी, उस पर आधारित था।
- मुंबई के अस्पताल की इस पहल से मरीजों को बातचीत के जरिए जीवन रक्षक उपचार की अग्रिम जानकारी दी जा सकती है। इससे वे गंभीर बीमारी में अपने लिए वेंटिलेटर आदि अनिश्चितकाल तक चलने वाले पीड़ादायक उपचार पर पहले ही निर्णय ले सकेंगे।
- 2023 में, सर्वोच्च न्यायालय ने पहले के दिशानिर्देशों को सरल बनाकर निष्क्रिय इच्छामृत्यु को आसान बना दिया है।
सम्मानजनक मृत्यु को एक अधिकार माना जाना चाहिए। इसे स्पष्ट कानूनों, सहानुभूतिपूर्ण प्रणालियों और जन जागरूकता के साथ समर्थित किया जाना चाहिए।
‘द इकोनॉमिक्स टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 01 जुलाई 2025
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