परीक्षा निकाय की परीक्षा कैसे हो?
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विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी), सीबीएसई और एनटीए का हालिया प्रदर्शन खराब रहा है। उनके टेस्ट सिस्टम असफल हो रहे हैं। इससे भारतीय युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। कुछ बिन्दु –
- बार-बार पेपर लीक होना, प्रशासनिक गड़बडि़याँ छिपाने की शर्मनाक कोशिशें, खराब कम्यूनिकेशन और उससे जुड़ा लाखों युवाओं का भविष्य, हमारे परीक्षा-तंत्र का यही परिचय रह गया है।
- नीट-यूजी 2024 के लीक के बाद शामिल किए गए सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को लागू करने के दौरान निगरानी में ऐसी कमी रही कि 2026 में फिर से पेपर लीक हो गया। इससे जुड़ा माफिया केन्द्र पर हावी होता दिख रहा है।
- सीबीएसई ने अपना स्कैनिंग सिटम तैयार होने से पहले ऑनस्क्रीन मार्किंग क्यों शुरू की? साफ तौर पर यह जुगाड़ वाला तरीका दिखाता है, जिसमें काम में कोताही बरती जाती है।
- सीयूईटी 2026 में एक तथाकथित तकनीकी गड़बड़ी हुई। परीक्षा में घंटों की देरी हुई। युवा टेस्ट पूरा नहीं कर सके। अधिकारियों ने बड़ी आसानी से कह दिया कि दोबारा परीक्षा का मौका मिलेगा। क्या उन्हें इसका अनुमान है कि परीक्षाओं के ऐसे न खत्म होने वाले सिलसिले से कितना नुकसान होता है?
- परीक्षा लेने वाले निकाय की जांच कौन करेगा कि इसका तंत्र बार-बार असफल क्यों हो रहा है? इसका हल अधिकारियों को बदलना नहीं है। पॉलिसी और डिजाइन की कमी से ऐसी समस्या उत्पन्न हो रही है। बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है और मैरिट को खत्म कर रहा है। यह युवाओं की पूरी एक पीढ़ी के साथ बड़ा घोखा है।
(‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित- 01/05/2026)