नए शहरों के निर्माण के लिए ध्यान देने योग्य आवश्यक पहलू

Afeias
08 Nov 2025
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हमारा भारतीय शहर बेंगलूरू, जिसे आईटी सिटी कहा जाता है, अपनी ही सफलताओं के बोझ तले दबा हुआ है। कंपनियाँ वहाँ से स्थानांतरित हो रही हैं। इसका कारण है- शहरों का अनियोजित व अदूरदर्शितापूर्ण निर्माण कार्य। इसके अन्य कारण निम्न हैं –

  • आईटी उद्योगों के लिए अन्य राज्यों ने लाल कालीन बिछाना शुरू कर दिया है। जोहो, एनवीडिया आदि के एक तिहाई कर्मचारी टियर-3 शहरों से पढ़े होते हैं। उत्तर व पूर्वी भारत में खूब आईटी प्रतिभाएँ हैं।
  • जेन-जी भविष्य का महत्वपूर्ण प्रतिभा पूल है। यह पीढ़ी कामकाज के साथ लचीलेपन, मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण को प्राथमिकात देती है। साथ ही काम व निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन चाहती है। ये न मिलने पर प्रवास भी करती है।
  • उत्तरप्रदेश की सरकार भी भूमि आवंटन द्वारा इनके आकर्षण का केंद्र बनना चाहती है।

हमें क्या करना चाहिए?

  • उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस वे के निर्माण की सफलता उल्लेखनीय है। यहाँ एक्सप्रेस वे प्रमुख शहरों के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के पास से गुजरती है। इससे उनके आस-पास बुनियादी ढाँचा विकसित किया जा सकता है। लेकिन ये क्लस्टर शहरी ढाँचें के समूह में नहीं खोने चाहिए, ताकि ये अपेक्षाओं पर खरे उतर सकें। 
  • वैश्विक आईटी हब सिलिकॉन वैली एक दर्जन छोटे कस्बों व शहरों में फैली हुई है। प्रमुख आईटी कार्यालय यहीं स्थित हैं। इनमें सभी शहर 10 लाख से कम की आबादी के हैं। आईटी हब के लिए गहरे प्रतिभा पूल, विश्वविद्यालय व उद्योगों के बीच मजबूत संबंध, सहायक बुनियादी ढाँचा तथा जीवन, निवास और संपत्ति की सुरक्षा से संबंधित पहलु शामिल होते हैं, भारत को इससे सीखना चाहिए।
  • एक नए क्लस्टर शहर निर्माण की रूपरेखा में औद्योगिक और वाणिज्यिक परिसरों एवं एक आवासीय टाउनशिप को शामिल करना चाहिए। एक आधुनिक टाउनशिप के निर्माण में धैर्यशील पूँजी, जोखिम उठाने की मानसिकता, शहर योजनाकारों, आधुनिक निविदाओं और सुगम शासन की आवश्यकता होती है।
  • इस पैमाने पर सफलता शहर के निर्माण की गति और गुणवत्ता से मापा जाना चाहिए। इसमें बिल्ड, आपरेट और ट्रांसफर का सिद्धांत सबसे व्यवहारिक विकल्प है। इसके लिए लीज कम से कम 99 वर्षों के लिए हो, जिसे 99 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सके, ताकि आकर्षक पूँजी रिटर्न हो सके। निविदा के लिए वैश्विक आमंत्रण दिया जाए।
  • नए शहरों का विकास शहरी विकास को प्रबंधित करने, संगठित बुनियादी ढाँचा विकसित करने, भीड़ को कम करने, आने-जाने में लगने वाले समय को घटाने तथा कम लागत पर बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने की दिशा में एक रणनीतिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • आर्थिक रूप से भी नए शहर नौकरियों व निवेश के आकर्षण का केंद्र होते हैं पूरक और सहायक व्यवसायों और सेवा उद्यमों का निर्माण करते हैं। इससे ये शहर जीडीपी वृद्धि में भी सहायक होते हैं।

2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो, इसके लिए छोटे और मध्यम आकार के शहरों का उचित निर्माण बहुत जरूरी है।

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