महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सरकार की पुनर्चक्रण योजना
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भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। इस हेतु भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की शुरूआत की है। इसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के लिए घरेलू क्षमता को बढ़ाना और आयात निर्भरता को कम करना है। इसके अंतर्गत खनन के साथ-साथ खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अनेक लाभ हैं –
- यह आयात पर निर्भरता कम कर सकता है। इससे आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से चलती रह सकती है।
- यह कचरे को कम करने में योगदान दे सकता है।
- खनन कम होने से पर्यावरण सुरक्षित रह सकता है।
- यह चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, जहाँ संसाधनों का बार-बार उपयोग होता है।
योजना का लक्ष्य –
- 2025-26 से 2030-31 तक 270 किलो टन की पुनर्चक्रण क्षमता स्थापित करना है।
चुनौतियाँ –
- फिलहाल भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादक है। लेकिन वह इसका केवल 15-17% ही पुनर्चक्रण करता है। वर्तमान योजना में पुनर्चक्रण को बढ़ाने के लिए सरकार संयंत्र, उपकरण और संबंधित उपयोगिताओं पर 20% तक पूंजीगत व्यय सब्सिडी देगी। लेकिन यह समाधान का एक हिस्सा ही हो सकता है।
- अनिवार्य नियमों और नियामक की आवश्यकता है, जो उद्योग को लैंडफिल कचरे से हटाकर पुनर्चक्रण की ओर ले जाएं।
- इसके अलावा तकनीकी बाधाएं हैं।
- प्रक्रियाओं की ऊँची लागत है।
- अपर्याप्त संग्रह और अवसंरचना या इंफ्रास्ट्रक्चर भी एक चुनौती है।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 15 सितंबर, 2025
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