ईरान में बढ़ता तनाव व उसके कारण

Afeias
28 Feb 2026
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हाल ही में यूरोपीय संघ ने ईरानी रिवॉल्यूशमरी गार्ड क्रॉप्स को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इसी कारण ईरान ने यूरोपीय देशों के राजदूतों को तलब किया। वही अमेरिकी युद्धपोत युएसएस अब्राहम लिंकन तेहरान पर नजर रखे हुए है। चूंकि यूरोप अपने मित्र अमेरिका के साथ है, इसलिए तनाव एक बार फिर गहरा गया है तथा प्रदर्शनकारियों का सड़क पर उतरने का हौसला बुलंद हुआ है।

यहाँ एक अहम् सवाल यह उठता है कि 1979 में जिस धर्मतंत्र को 98% बहुमत के साथ स्वीकार किया गया था, लोग आज उसी तंत्र के विरूद्ध सड़कों पर क्यों हैं? क्या लोग बाहरी दुनिया को जानकर खुद भी अब बेहतर दुनिया की तलाश कर रहे हैं? आइये इस दमन के बारे में जानने का प्रयास करते हैं –

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल की टिप्पणी, “यह केवल हिंसक दमन नहीं, एक सुनियोजित नरसंहार था।” ईरान की दमनात्मक कार्यवाही का सच बताती है।
  • अमेरिका स्थित ‘हयूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ के अनुसार 6713 लोग मारे गए, जबकि खामनेई के विरोधी यह आंकड़ा 50000 बताते हैं।
  • ‘न्यूयार्क टाइम्स’ सहित पश्चिम के कई अखबार ईरान के 19 इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ बरसाने के 40 से अधिक वीडियो की पुष्टि कर चुके हैं। इस तरह के दमन ने ईरानी राज्य का पर्दाफाश कर दिया है।

लोगों का इस प्रकार सड़कों पर प्रदर्शन करने का कारण –

  • लोग इस उम्मीद में बाहर निकले थे कि उन्हें अच्छी प्रशासनिक सुविधाएँ मिलेंगी, क्योंकि उन्हें अपने नेता खामनेई से कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। 
  • ट्रंप द्वारा ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में दिया गया समर्थन भी प्रदर्शन के लिए आक्सीजन का काम कर रही है।
  • ईरान में ये प्रदर्शन समाज के टूटने का भी प्रमाण है। यह संकट सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक भी है।
  • ईरान की आंतरिक अशांति का कारण है कि लोग राजतंत्र को खत्म करके नागरिक अधिकारों की बहाली चाहते हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इस्लामी मिलिशिया ने सड़़को से लेकर लोगों के जीवन तक पर कब्जा कर दिया। मानवाधिकारों को भी कुचला गया। इसीलिए 2009, 2017-18, 2022 और 2025 में लोग सड़कों पर उतरे।
  • आज का शहरी मध्यमवर्ग इस्लामी क्रांति को न तो जानता है, और न ही उससे कोर्ई भावनात्मक लगाव रखता है। डिजिटल मीडिया पर अब लोग अमीरों की संतानों को विदेशों में पलता-बढ़ता देखते हैं जबकि उन्हें मुश्किल से 2 वक्त का ही भोजन मिल पाता है।

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