
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम
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- यह ‘लाइफ कॉन्सेप्ट’ यानि जीवन की अवधारणा या पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली बनाने के लिए एक पहल है। इसका उद्देश्य हमारी परंपरा में निहित पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है।
- यह एक नवोन्मेषी पहल है, जो बाजार आधारित है। इसे व्यक्तियों, समुदायों, निजी क्षेत्र के उद्योगों और कंपनियों की सहायता से विविध क्षेत्रों में स्वैच्छिक पर्यावरणीय गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- एक यूजर-फ्रेंडली डिजिटल प्लेटफार्म से परियोजनाओं के पंजीकरण, सत्यापन और ग्रीन क्रेडिट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। अतः इंडियन कांउसिल ऑफ फारेस्ट्री रिसर्च एण्ड एजुकेशन या आईसीएफआरई ने ऐसा पंजीकरण और ट्रेडिंग प्लेटफार्म विकसित किया है। यह पंजीकरण और उसके बाद ग्रीन क्रेडिट खरीद-बिक्री की सुविधा प्रदान करता है।
- इस पहल का ध्येय व्यक्तिगत पसंद और व्यवहार को धारणीयता की ओर प्रेरित एवं विभिन्न क्षेत्रों में स्वैच्छिक पर्यावरणीय एक्शन को प्रोत्साहित करना है।
- वैश्विक स्तर पर इसका उद्देश्य ज्ञान, अनुभव और कार्यान्वयन के आदान-प्रदान के माध्यम से वैश्विक सहयोग और साझेदारी को सुविधाजनक बनाना है।
ग्रीन क्रेडिट गतिविधियां –
- वृक्षारोपण
- जल-संरक्षण
- धारणीय कृषि
- कचरा-प्रबंधन
- वायु प्रदूषण में कमी
- मैंग्रोव संरक्षण एवं पुनर्स्थापन। तथा
- बुनियादी ढांचे और बिल्डिंग में धारणीयता।
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम का महत्व –
1) वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।
2) पर्यावरण समर्थक गतिविधियों के लिए दुनियाभर में व्यक्तियों, समुदायों, निजी कंपनियों और देशों की भागीदारी बढ़़ेगी।
ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम से जुड़ी आशंकाएं –
- पर्यावरण अनुकूल एक्शन का सत्यापन जटिल और थकाऊ हो सकता है।
- ‘ग्रीन वाशिंग‘ यानि ग्रीन क्रेडिट लेने के लिए झूठे दावे किए जा सकते हैं।
- दो प्रकार के पर्यावरण क्रेडिट के बीच ओवरलैप और मूल्यांकन की जटिलता हो सकती है।
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