यूरोप से बढ़ते भारत के रिश्ते

Afeias
04 Feb 2026
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अमेरिकी टैरिफ तनाव के बीच हमारे लिए अच्छी खबर यह है कि यूरोप के कई देशों से हमने रिश्तों में बढ़त बना ली है। भारत-यूरोप रिश्तों को मजबूत करने के लिए भारत-यूरोपियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता इसका ताजा प्रमाण है।

कुछ बिंदु –

  • यूरोपीय यूनियन का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी है। 2024-25 में 50 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापार के साथ, जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा टेड्रिंग पार्टनर बना हुआ है। दोनों के बीच जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटरेस्ट और मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की एक पूरी श्रृंखला पर हस्ताक्षर हुए हैं।
  • फिलहाल यूरोपियन कमीशन अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने भारत से होने वाले समझौतों को मदर ऑफ ऑल डील बताया है। अनुमान है कि इससे 2 अरब लोगों का बाजार तैयार हो सकेगा।
  • दोनों ही पक्षों का लक्ष्य नियम आधारित व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत करना है। साथ ही सुरक्षित, खुली और मजबूत दुनिया बनाने के लिए मिलकर काम करना उनकी प्राथमिकता है।
  • यूनियन और भारत कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट सिस्टम, कार्बन-इंटेंसिव-गो-ईट्स पर टैक्स जैसे मुश्किलों पर एक समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • यूनियन और जर्मनी दोनों ही भारत-प्रशांत महासागर क्षेत्र पर भारत के साथ करीबी बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं।
  • फिलहाल चीन के साथ जर्मनी का द्विपक्षीय व्यापार सबसे ज्यादा है। इस स्थिति में जर्मन चांसलर का एशिया में भारत को प्राथमिकता देना और भी ज्यादा महत्व रखता है।

भारत और यूरोप के कुछ देशों में यूक्रेन रूस युद्ध को लेकर मतभेद है। लेकिन विश्व-व्यवस्था को नियम-आधारित बनाने में अगर दोनों पक्ष कुछ भी योगदान दे सकें, तो यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी हो सकता है।

‘द हिंदूमें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 14 जनवरी 2026