कॉरपोरेट बोर्ड के लिए न्यूनतम आयु में कमी
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हाल ही में संसदीय स्थायी समिति ने प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक बनने की न्यूनतमआयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की है। इसका कारण डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप संस्कृति का बढ़ता प्रभाव है। इससे जुड़े कुछ तर्क –
पारंपरिक सोच बनाम नई अर्थ व्यवस्था –
- कारपोरेट नेतृत्व के संबंध में अभी तक यही धारणा रही है अधिक उम्र से अधिक अनुभव आते हैं। इसी से बेहतर नेतृत्व सामने आता है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए नवाचार जरूरी है। नई सोच, तकनीकी समझ तथा बदलते उपभोक्ता व्यवहार की समझ का प्रयोग करने की प्रवृत्ति आदि आज के युवाओं की ताकत है। इलॉन मस्क, स्टीव जॉब्स तथा जकरबर्ग आदि ने जिस कम उम्र में बड़ी-बड़ी कंपनियों की नींव रखी है, ये सब इस तथ्य का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
भारत के लिए महत्व –
आज हम विश्व के सबसे युवा देशों में से एक हैं। उद्यमिता और नवाचार से युक्त नेतृत्व क्षमता से जनसांख्यिकीय लाभांश को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदला जा सकता है।
एआई का बढ़ता वर्चस्व –
कॉरपोरेट प्रबंधन की प्रकृति तेजी से बदल रही है। आज डेटा विश्लेषण, बाजार पूर्वानुमान, जोखिम का आकलन, प्रशासनिक कार्यों और निर्णय लेने में भी एआई सहायता कर रहा है। इसकी मदद ने युवाओं के प्रबंधन सीखने की गति को तीव्र कर दिया है।
अत: संसदीय समिति के इस सुधार से नवाचार को बढ़ावा, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती, तकनीकी परिवर्तन की गति बढ़ने, रोजगार सृजन एवं कॉरपोरेट संस्कृति में बदलाव जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
(‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित 05/08/26)