भारतीय परिवारों के स्वर्ण से अर्थव्यवस्था को मजबूती
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पिछले कुछ समय से सोने की कीमतें आकाश छू रही हैं। इसका कारण ट्रंप और अमेरिका के फेडरल रिजर्व प्रमुख जीरोम पावेल के बीच ब्याज दरों एवं अन्य वित्तीय मुद्दों पर हुई तनातनी को माना जा रहा है। इससे भारतीय परिवारों को लाभ हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था में इसका क्या योगदान हो सकता है, इस पर कुछ बिंदु –
- भारतीय परिवारों के पास दुनिया के सभी सेंट्रल बैंको में जमा सोने के बराबर सोना है। मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के अनुसार, लगभग 35,000 टन सोना भारतीयों के पास है।
- यह अब तक खदानों से निकाले गए कुल सोने का लगभग पांचवां हिस्सा भी है।
- भारत सोने का बड़ा उत्पादक नहीं है। इसलिए उसे विदेशों से फॉरेक्स में लेन देन करना पड़ता है।
- भारतीय घरों में बेकार पड़े जेवरों का केवल 1% ही दुनिया की इलेक्ट्रोनिक्स, डेंटिस्ट्री आदि औद्योगिक जरूरतों की एक साल तक पूर्ति के लिए काफी है।
- यह आरबीआई के 880 टन सोने के भंडार से 3% कहीं ज्यादा है।
- भारतीय परिवारों के सोने से प्रतिवर्ष आयात शुल्क में 50-60 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।
- भारतीयों के सोने को बाजार में लाने के लिए सरकार और आरबीआई को ऐसा तरीका लाना होगा, जिससे लोग इसे सुरक्षित और आसान तरीके से बेच सकें। लोगों के पास इसे कैश करवाने या डीमैट फॉर्म में रखने का विकल्प होना चाहिए।
ऐसा संभव होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़े परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 3 फरवरी, 2026