अमेरिकी वीजा नीति से प्रभावित होते भारतीय छात्र
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पिछले कुछ वर्षों में भारत से विदेश जाकर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या काफी बढ़ी है। इनमें अमेरिका और यू.के. जाने वाले छात्र ज्यादा होते हैं। ट्रंप की नीतियों से इस चलन में गिरावट आ गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अगस्त में जारी अमेरिकी वीजा में 4.5% की गिरावट आ गई है। ऐसी स्थितियों को कैसे संभाला जा सकता है –
- हाल ही में एक प्रकाशित लेख में बताया गया है कि आईआईटी एंट्रेंस में टॉप 100 स्कोर करने वलों में से 62% विदेश में हैं। इस वर्ष भी जिन छात्रों को वीजा नहीं मिल पाया है, उनमें टैलेंट की कमी नहीं है।
विदेश जाकर काम करने वाली ये प्रतिभाएं वेंचर कैपिटल, नॉलेज और नेटवर्क कनेक्शन देकर देश में आईटी उद्योग को बढ़ावा देती हैं।
- ऐसी प्रतिभाओं की मदद के लिए देश में एक इमिग्रेशन मंत्री की जरूरत है, जो केंद्रीय मंत्रालय और राज्यों के साथ कोऑर्डिनेट करके टैलेंट सप्लाई को संभव बना सके।
- शिक्षा अब वैश्विक होती जा रही है। सरकार को चाहिए कि विदेश जाने के इच्छुक छात्रों को अन्य देशों में पढ़ाई के लिए गाइड करे। इससे अंततः देश को लाभ ही होना है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 10 अक्टूबर, 2025
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