सार्वजनिक स्वास्थ्य कैडर

Afeias
03 Nov 2017
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Date:03-11-17

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भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बहुत खराब है। सन् 1959 की मुदलियार समिति एवं 1973 की करतार सिंह समिति दोनों ने ही महसूस किया था कि एक चिकित्सक जिस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करता है, वह पश्चिमी चिकित्सकीय शिक्षा पर अधिक आधारित है। अतः उसकी प्रासंगिकता हमारे देश की परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है। जिन परिस्थितियों में हमारे चिकित्सकों को काम करना पड़ता है, वैसा ज्ञान उन्हें अध्ययन के दौरान नहीं दिया जाता।

2017 में आई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में इस बात की वकालत की गई है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रंधन कैडर की शुरुआत की जानी चाहिए। इसके माध्यम से कुछ विशिष्ट, समर्पित एवं प्रशिक्षित लोगों को चुना जा सकेगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकेंगे।

वर्तमान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जिन चिकित्सकों की नियुक्ति करता है, उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनेक एवं जटिल कार्यों को सम्पन्न करना होता है। अधिकतर स्थानों पर ये कार्यक्रम विफल जैसे ही होते हैं। इनमें गुणवत्ता का अभाव होता है। ये संरचित नहीं होते। इसके पीछे कारण यही है कि एक नेत्र चिकित्सक को भी कई बार मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रमों का संचालन करना पड़ता है। वर्तमान में स्वास्थ्य कैडर के अभाव के कारण मंत्रालय में भी उच्च पदों पर ऐसे व्यक्ति बैठे हुए हैं, जिन्हें देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित कोई अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त नहीं है।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य कैडर को प्रशासनिक सेवाओं की तर्ज पर बनाए जाने का सोचा गया है। इसमें चयनित चिकित्सकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में दो-तीन वर्ष के लिए उनकी नियुक्ति अनिवार्य होगी।
  • ये प्रशिक्षित चिकित्सक सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तरप्रदेश जैसी बड़ी गलतियों को होनेे से रोक सकेंगे।
  • गुणवत्ता से परिपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के कुशल कार्यान्वयन से गरीबों को बहुत लाभ मिलेगा। उनका स्वास्थ्य खर्च कम होने से उनके जीवन-स्तर में सुधार होगा।
  • इस प्रक्रिया में हम विशेषज्ञों को अपेक्षित स्थानों पर नियुक्त करके उनका पूरा लाभ उठा सकेंगे।
  • स्वास्थ्य कैडर के निर्माण से उन नौकरशाहों को मुक्त किया जा सकेगा, जिनका महत्व अन्य विभागों में अधिक है।

कैडर के निर्माण का खर्च स्वास्थ्य मंत्रालय के बजट में ही केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य कैडर के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के मानवीकरण, वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य सामग्री प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञता एवं आवश्यक सामाजिक निर्धारकों की प्राप्ति में मदद मिलेगी।

‘द हिन्दू’ में प्रकाशित धर्मेश कुमार लाल के लेख पर आधारित।