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क्या अनुबंधित श्रमिकों को समान वेतन मिल पाएगा?

Afeias
17 Nov 2016
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india-labourDate: 17-11-16

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हाल में ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुबंधित श्रमिकों के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इसके अनुसार अनुबंधित श्रमिकों को भी स्थायी श्रमिकों के बराबर वेतन दिया जाएगा। अब रोज कमाने वाले श्रमिकों, अस्थायी एवं अनुबंधित श्रमिकों को स्थायी श्रमिकों की तुलना में समान काम के लिए समान वेतन न दिए जाने को दादागिरी से करवाई जाने वाली बंधुआ मजदूरी की तरह देखा जाएगा। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि ‘समान काम के लिए समान वेतन न मिलना मानवीय गरिमा के विरूद्ध है।’न्यायालय को यह फैसला हांलाकि सरकार द्वारा अनुबंधित किए जाने वाले श्रमिकों के लिए आया है, लेकिन जाहिर है कि इसका प्रभाव सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र पर भी उतना ही पड़ेगा। अभी तक अपने को अपेक्षाकृत उत्कृष्ट समझने वाले स्थायी श्रमिकों का बोलबाला रहा है, क्योंकि उन्हें नौकरी की सुरक्षा एवं उच्च वेतन पर रखा जाता है। इन कम संख्या वाले स्थायी श्रमिकों से अलग, अनुबंधित श्रमिकों की संख्या तो बहुत अधिक होती है, लेकिन इनका भरपूर शोषण हो रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का तत्काल  प्रभाव से सकारात्मक प्रभाव पड़ना चाहिए। परंतु अफसोस कि ऐसा होना बहुत दूर की बात लगती है। इसके पीछे कई कारण है

  • ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत किसी फैक्टरी में काम करने वाला कर्मचारी यूनियन का सदस्य बन सकता है। आमतौर पर देखा यह जाता है कि किसी फैक्टरी में काम करने वाले स्थायी कर्मचारी ही यूनियन के सदस्य होते हैं। इसका कारण यही है कि अनुबंधित श्रमिको को फैक्टरी का कर्मचारी माना ही नहीं जाता।
  • हालांकि श्रमिक कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ‘किसी व्यवसाय या उद्योग में काम करने वाले सभी कर्मचारी; चाहे वे मालिक या नियोक्ता के द्वारा नियुक्त हों या न हों’ उन्हें उस जगह का कर्मचारी ही माना जाएगा।
  • कोई भी कर्मचारी संघ अनुबंधित श्रमिकों को सदस्य बनाने को तैयार नहीं होता।
    • स्थायी श्रमिकों को लगता है कि अनुबंधित श्रमिकों को यूनियन का सदस्य बनाने से मालिक के साथ उनके रिश्तों में कड़वाहट बढ़ेगी।
    • फैक्टरी का प्रबंधन भी यूनियन से अनुबंधित श्रमिकों के बारे में कोई बात करने को तैयारी नहीं होता।
    • आज के समय में जब कंपनी स्थायी कर्मचारी को भी बर्खास्त करने में समय नहीं लगाती, तो फिर अनुबंधित श्रमिक की क्या औकात मानी जाएगी।
    • किसी भी फैक्टरी में स्थायी श्रमिकों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में अनुबंधित श्रमिकों को यूनियन की सदस्यता देकर ये स्थायी कर्मचारी अपनी अहमियत खोना नहीं चाहते। मुख्य मुद्दा यही है कि ये स्थायी कर्मचारी अपने आर्थिक लाभ के कारण अनुबंधित श्रमिकों का महत्व बढ़ने नहीं देना चाहते।
    • आज स्टील और कोयला जैसे कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के अलावा बाकी जगह अनुबंधित श्रमिकों का बेतहाशा शोषण किया जा रहा है।
    • पहले अनुबंधित श्रमिकों को सफाई, रखरखाव, बागवानी जैसे कामों के लिए रखा जाता था। धीरे-धीरे इन्हें उत्पादन के क्षेत्र में भी लिया जाने लगा। स्थायी श्रमिकों की बारह महीने नियुक्ति पर रोक लगा दी। अब होने यह लगा कि अनुबंधित श्रमिकों को दिखावे के लिए सफाई, रखरखाव या बागवानी जैसे कामों के लिए अनुबंधित किया जाता है, परंतु उत्पादन जैसे मुख्य कामों में लगा लिया जाता है। सन् 1970 के इस कानून ने अनुबंधित श्रमिकों को दोहरी मार दी।
    • सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से इन श्रमिकों के साथ जु़ड़ा पुराना सवाल फिर उठ खड़ा होता है कि रोज अपने काम के ठिकाने बदलने वाले इन श्रमिकों को एकत्रित करके संगठन कैसे बनाया जाए। जब तक इनमें संगठन नहीं होगा, न्यायालय के किसी भी फैसले से इनके जीवन में कोई बदलाव नहीं आएगा।

हिंदू में प्रकाशित जी.सम्पत के लेख पर आधारित।

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