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बड़ी परीक्षा के लिए रखें बड़ी सोच (सिविल सर्विस की योग्यता के आधार)

Afeias
31 Jan 2019
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डॉ०विजय अग्रवाल

अन्ततः वह दिन आने ही वाला है, जिसका आप सब में से कई बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आय.ए.एस. की परीक्षा का विज्ञापन आते ही देश के बहुत से नौजवान फटाफट फार्म भरने में लग जाते हैं, जिसका मैं स्वागत करता हूँ। सन् 2012 के बाद से लगातार सिविल सर्विस परीक्षा में बैठने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में जबर्दस्त रूप से उछाल आता गया है। सन् 2012 में जो संख्या साढ़ पाँच लाख के करीब थी, वह 2013 में ही एक साल में बढ़कर पौने आठ लाख और 2017 में लगभग 12 लाख हो गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से बैठने वालों का प्रतिशत हर साल लगभग आवेदन करने वालों का आधा रहा। जाहिर है कि शेष युवाओं ने यूँ ही ताबड़तोड़ में फार्म भर दिये थे।
सिविल सर्विस में परीक्षार्थियों यह बढ़ती हुई संख्या निश्चित तौर पर इस सेवा के लोकतांत्रिक होने का एक बहुत पुख्ता प्रमाण है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि दूरदराज के गाँवों में रहने वाले तथा सामान्य स्तर के स्टूडेन्टस् भी अब सिविल सर्वेन्ट बनने के बारे में सोचने लगे हैं। उनकी यह भावना भी स्वागत योग्य है।

लेकिन चिन्ता वहाँ होती है, जब इस बड़ी संख्या में एक बड़ी संख्या उन लोगों की होती है, जो निजी क्षमताओं और परिस्थितियों का अनुमान लगाये बिना ही इस परीक्षा की तैयारी मंे लग जाते हैं। और अपने जीवन के सर्वोत्तम दौर का एक महत्वपूर्ण टुकड़ा तथा धन का भी एक पर्याप्त भाग अविवेकपूर्ण निर्णय के कारण नष्ट कर देते हैं। निःसंदेह रूप से यह कहना गलत नहीं है कि यदि आप सोचेंगे ही छोटा तो बड़ा कैसे बन पायेंगे और यदि आप बड़ा सोचेंगे, तो भले ही आप बड़े न बन पायें, लेकिन कुछ न कुछ तो बन ही जाएंगे। लेकिन दरअसल, यहाँ चिन्ता उन मनोवैज्ञानिक स्थितियों के प्रति है, जिस दौर से इस दौरान यह युवा वर्ग गुजरता है। अक्सर यह भी देखने में आया है कि वह इसके लिए अपने सामने उपलब्ध या अपने हाथ में मौजूद अच्छे अवसरों को भी छोड़ देता है। यह कहना तो पूरी तरह सही नहीं होगा कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन यह बताया ही जाना चाहिए कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने की संभावना का प्रतिशत इतना अधिक कम है कि जीवन के प्रति एक रियलिस्टिक एप्रोच रखकर निर्णय लेना बेहतर होगा।
इसी बात को ध्यान में रखकर मैं यहाँ कुछ वे गुण, क्षमता तथा परिस्थितियों की सूची प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो आपकी यह निर्णय लेने में मदद करेंगे कि आपको सिविल सेवा परीक्षा में बैठना चाहिए या नहीं। यहाँ मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि यहाँ मेरा सरोकार परीक्षा की तैयारी करने का तरीका बताने से बिल्कुल भी नहीं है। इसका संबंध मात्र उस आधार से है, जो मूलभूत रूप में किसी भी परीक्षार्थी में होने की अपेक्षा की जाती है।

तो आइए, कुछ ऐसे बिन्दुओं को देखते हैं-

  • आपके पास परीक्षा की सम्पूर्ण प्रणाली की जानकारी होनी चाहिए।
  • साथ ही पाठ्यक्रम को देखकर यह अंदाजा लगायें कि वह आपके वश में है या नहीं। इसके लिए अनसाल्ड पेपर भी आपकी मदद करते हैं।
  •  पढ़ने में रूचि का होना बहुत अधिक जरूरी है। यहाँ अनमनापन काम नहीं करेगा।
  • आप प्रतिदिन कम से कम दो घंटे इसे दे पायेंगे या नहीं। जहाँ तक औसत का सवाल है , प्रतिदिन 5 घंटे का औसत अनिवार्य होना चाहिए।
  • साथ ही यह भी जरूरी है कि इसमें अंतिम सफलता के लिए भी न्यूनतम 3 वर्ष मानकर चलना चाहिए। क्या आपके पास इतना समय हैं ?
  • बहुत तेज तो नहीं, लेकिन स्मरण शक्ति ऐसी तो हो ही कि महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट रूप से कम से कम डेढ़-एक साल तक तो याद रख ही सकें।
  • इसके लिए यह भी जरूरी होता है कि आपमें किसी भी समस्या पर अपनी ओर से सोचने-विचारने की क्षमता हो।
  • भाषा पर आपकी पकड़ अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि भाषा के माध्यम से ही आपके विचार परीक्षक तक पहुँचते हैं।

ये वे क्षमताएं हैं, जो यदि बीज रूप में आपके अन्दर हैं, तो भविष्य में आप इन्हें अधिक बेहतर बनाकर सफलता की मंजिल को पा सकते हैं।
आप सबको मेरी शुभकामनाएं।

Note: This article of Dr. Vijay Agrawal was published in “Jagran Josh” dated 23-January-2019.

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