नशे के बढ़ते कारोबार से मुक्ति कैसे मिले
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पूरी दुनिया में नशा और मादक पदार्थों का कारोबार ज्वलंत समस्या बना हुआ है। इसके विरूद्ध काफी समय से अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि इसके विरोध में चलाए जाने वाले अभियान ही अनजाने में इसे आकर्ष बनाते गए हैं। ‘जस्ट से नो’ जैसे नारे या फिल्मों और गीतों में इसके दुष्परिणाम दिखाने की कोशिश ने युवाओं में ‘बैड बॉय’ की छवि को आकर्षक बना दिया। ऐसी स्थितियों में इस बुराई से निपटने का रास्ता बहुत मुश्किल हो जाता है।
कुछ समाधान –
- युवाओं को डराने की बजाय उन्हें शिक्षा और सही मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए।
- मेंटरशिप और सामुदायिक केन्द्रों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- युवाओं के लिए रोजगार के सार्थक अवसर पैदा किए जाने चाहिए।
- सामाजिक अलगाव और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं की जड़ पर प्रहार किया जाना चाहिए।
- नशे की लत में पड़े लोगों के लिए पर्याप्त इलाज, पुनर्वास और मानसिक-सामाजिक सहायता उपलब्ध होनी चाहिए।
सरकारी पहल –
हाल ही में हमारे गृह मंत्री ने 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इस हेतु एक प्रारूप भी तैयार किया गया है। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मादक पदार्थ कार्यबल बनाए गए हैं, और स्थानीय पुलिस को राष्ट्रीय रणनीति से जोड़ा गया है। वर्ष 2019 में एक संयुक्त समन्वय समिति भी बनाई गई थी, ताकि केन्द्रीय एजेंसियां और राज्य सरकार मिलकर नशे के बडे नेटवर्क और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क पर संयुक्त निर्णय ले सकें।
सरकारी और सामाजिक प्रयासों से इस कारोबार को नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। इसके लिए तस्करों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच की मिलीभगत पर भी शिकंजा कसा जाना चाहिए।
(‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित- 01/09/2026)