जिमखाना क्लब में बदलाव जरूरी
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हाल ही में केन्द्र सरकार ने दिल्ली के जिमखाना क्लब को खाली करने का नोटिस दिया है। यह ब्रिटिश काल के समय का क्लब है, जिसे अंग्रेजों ने 27 एकड़ भूमि लीज़ पर दी थी। उन्होंने ऐसा न केवल अपने अधिकारियों के मनोरंजन के लिए जगह बनाने के लिए किया, बल्कि उनकी नेटवर्किंग के लिए भी किया था।
इस क्लब से जुड़ी कुछ बातें, जो इसके उद्देश्य को पूरा करती हुई नहीं लगती हैं –
- भारत के बदलने के साथ ही यहाँ के संभ्रांत वर्ग की बनावट भी बदल गई है। लेकिन जिमखाना क्लब की सदस्यता का तरीका नहीं बदला है।
- इस क्लब के 80% सदस्य अभी भी प्रशासनिक अधिकारी और सैन्य अधिकारी हैं। सबसे बड़ी कमी उद्योग जगत के महारथियों, स्टार्टअप्स के युवा फांउडर, नई संस्कृति में अपनी धाक जमाने वाले सितारों की है।
- इसका कारण इस क्लब की सदस्यता को जागीर प्रथा की तरह चलाया जाना है। यूं तो क्लब कहता है कि सदस्यता विरासत का मामला नहीं है। लेकिन यह सिर्फ शब्दों तक सीमित है।
- आज दुनिया भर में नेटवर्किंग अहम् हो चुकी है। नई दिल्ली तो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का मुख्य स्थान है। यहाँ से एक बड़ा सरकारी तंत्र काम कर रहा है। यह बड़े और विशेष लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण नेटवर्किंग की जगह है। ऐसे शहर के एलीट क्लब के अपने अनेक लाभ हैं। अत: सरकार यदि इसके संचालन के तरीके में बदलाव लाकर इसका विस्तार और आधुनिकीकरण करना चाहती है, तो इसे उचित कहा जाना चाहिए।
(‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित-27/05/2026)