मजदूर और मजदूरी

Afeias
14 May 2026
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हाल ही में एनसीआर जोन नोएडा में फैक्‍टरीकर्मियों ने वेतन वृद्धि को लेकर हिंसक विरोध किया है। इसका कारण भी गलत नहीं कहा जा सकता है। हरियाणा ने एक अप्रैल से न्‍यूनतम वेतन बढ़ाया है। इसे देखते हुए उत्तरप्रदेश सरकार ने भी दिल्‍ली से सटे अपने क्षेत्रों में वेतन वृद्धि कर दी है, जो दिल्‍ली की तुलना में अभी भी कम है। देश की राजधानी क्षेत्र के लिए श्रमिकों की इस मांग से जुड़े बिन्‍दु –

  • इंडस्‍ट्री में अलग-अलग तरह के लोगों और बाजार की जरुरतों को ध्‍यान में रखते हुए, एनसीआर में एक जैसी वेतन नीति रखी जानी चाहिए।
  • एनसीआर देश का सबसे बड़ा श्रम बाजार है। लेकिन दशकों बाद भी विनिर्माण निवेश को संभालने में यह दक्षिणी राज्‍यों जैसा नहीं बन पाया है। दक्षिणी राज्‍यों में कंपनियां पहले से आवंटित भूमि पर ही दुकाने खोलती हैं। उसी पर बुनियादी ढांचा और श्रमिक आवास बनाती हैं। नियोक्‍ता-श्रमिक विवाद में सरकार मध्‍यस्‍थ होती है। सरकार ही श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।
  • नियोक्‍ता-श्रमिक विवाद के अलावा भी एक बड़ी समस्‍या यह है कि देश में हल्‍के विनिर्माण में नियमित वेतन वाली नौकरियां नहीं आ रही हैं। नाकरियां कम हैं, और श्रमिक अधिक। इसका समाधान तो विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ कौशल प्रशिक्षण को बढ़ाने में है। सरकार भी मानती है कि निर्यात पर असर पड़ा है। लेकिन हमारा घरेलू उपभोग अच्‍छा रहा है। अंतत: कुंठा से गुस्‍साए श्रमिकों के लिए जड़ तक काम किया जाना चाहिये।

‘द टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित-15/04/26