नए हालात में ऊर्जा पर हो नई रणनीति

Afeias
02 May 2026
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अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों का आवागमन गंभीर रूप से बाधित हो गया है, जहाँ से विश्‍व के 20% गैस व तेल का आवागमन होता है। इसी कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम की स्थिति बन गई है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का 90% तथा गैस का 50% हिस्‍सा आयात करता है और इन आयातों का 90% होर्मुज स्‍ट्रेट से आता है। यद्यपि हमने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई, फिर भी इसमें पश्चिम एशिया का हिस्‍सा 59% है।

हाइड्रोजन आयात में एक अनियंत्रित क्षेत्र पर निर्भरता का परिणाम यह है कि जितना लंबा यह युद्ध चलेगा, भारत का आयात बिल उतना ही बढ़ेगा।

हमारी भविष्‍य के लिए नीति क्‍या हो?

  • सोलर पी.वी. तंत्र 25-35 वर्ष तथा पवन टर्बाइन 20-25 वर्ष चलते हैं। लेकिन हमें ग्रिड, स्‍टोरेज और विनिर्माण संबंधित निर्भरता के लिए अधिक तत्‍परता से काम करना चाहिए।
  • हमारे पास 275 गीगावॉट से अधिक की गैर-जीवाश्‍म ऊर्जा क्षमता है। लेकिन यह पर्याप्‍त नहीं है। इसीलिए योजनाओं में तेजी से परिवर्तन होना चाहिए।
  • हमें 2030 तक अपने अक्षय ऊर्जा लक्ष्‍य को 500 गीगावॉट से 1500 गीगावॉट करने की आवश्‍यकता है। इससे बाजार, विनिर्माताओं, राज्‍यों और निवेशकों को मजबूत संदेश मिलेगा।
  • 1500 गीगावॉट के लक्ष्‍य के लिए आवश्‍यक है कि बुनियादी ढ़ांचे पर काम किया जाए। गुजरात, राजस्‍थान, कर्नाटक और तमिलनाडु के अक्षय ऊर्जा से समृद्ध क्षेत्रों में ट्रांसमिशन ग्रिड को तेजी से मजबूत करने की आवश्‍यकता है। 11 अक्षय ऊर्जा प्रबंधन केन्‍द्रों की संख्‍या बढ़ाने की आवश्‍यकता है।
  • अक्षय ऊर्जा से जुड़ी हर निविदा में बैटरी भंडारण अनिवार्य किया जाना चाहिए , ताकि जिससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। जिस तरह अधिकांश अक्षय ऊर्जा उपकरणों पर वस्‍तु एवं सेवा कर 5% है, उसी तरह भंडारण संपत्तियों पर भी 5% जीएसटी ही लगाया जाए।
  • घरेलु ऊर्जा खपत में एलपीजी का बहुत बड़ा हिस्‍सा है। इसे कम करने के लिए इंडक्‍शन कुकर पर मांग आधिारित योजना शुरु करनी चाहिए। इसके लिए उज्‍जवला योजना का डेटाबेस प्रयोग किया जा सकता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन को प्रोत्‍साहन देने के लिए चार्जिंग ढ़ांचे को मजबूत करना होगा। एक स्‍पष्‍ट परिवहन विद्युतीकरण का रोडमैप तैयार करना होगा। आधुनिक सेल बैटरी भंडारण के लिए उत्‍पादन संबंधी प्रोत्‍साहन योजना को सही करना जरूरी है।
  • हमें छोटे माड्यूलर रिएक्‍टर सहित परमाणु ऊर्जा के 100 गीगावाट के अपरिहार्य लक्ष्‍य को पूरा करना होगा।
  • हमें यह भी ध्‍यान देना होगा कि हम अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ उसके लिए उपयोगी महत्‍वपूर्ण खनिज तथा मूल्‍य श्रंखलाओं पर भी ध्‍यान दें। इसके लिए हमें महत्‍वपूर्ण खनिज पदार्थ में विविधता लानी होगी तथा मध्‍यवर्ती प्रसंस्‍करण क्षमता भी विकसित करनी होगी। प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण और क्षमता निर्माण के लिए अंतरराष्‍ट्रीय रणनीतिक साझेदारियों का लाभ उठाना होगा।

वर्तमान अनिश्चितता के दौर में हम कार्रवाई कर ऊर्जा संप्रभुता की ओर बढ़ सकते हैं।

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