शहरों की तपन : कारण और समाधार

Afeias
28 Mar 2026
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कारण –

  • हरियाली और जलाशयों का विनाश – पेडों की कमी और तालाबों के सूखने से ‘इवैपो-ट्रांसपिरेशन‘ (प्राकृतिक शीतलन) की प्रक्रिया बंद हो गई है। अनियोजित शहरीकरण ने प्रकृति के उस सुरक्षा कवच को खत्म कर दिया है, जो तापमान को नियंत्रित रखता था।
  • कांक्रीट और शीशों का उपयोग – प्राकृतिक जमीन की जगह कांक्रीट और डामर ने ले ली है। ये सतहें दिन में गर्मी सोखकर रात में छोड़ती हैं, जिससे तापमान बढ़ता है। इमारतों के बाहरी हिस्सों में शीशों का भारी उपयोग भी शहरों की गर्मी बढ़ाने का एक बड़ा कारण है।
  • एयर कंडीशनर्स का दुष्चक्र – एयर कंडीशनर्स और एसी वाहनों के इंजन भारी मात्रा में गर्मी बाहर फेंकते हैं। एसी के बढ़ते उपयोग से एक दुष्चक्र बन गया है, जहां कमरे को ठंडा करने की प्रक्रिया शहर के बाहरी परिवेश के तापमान को और अधिक बढ़ा देती है।
  • हवा के बहाव में रुकावट – ऊंची व सघन इमारतें हवा के प्राकृतिक बहाव को रोककर ‘अर्बन कैन्यन‘ बनाती हैं, जहां गर्मी फंस जाती है। शहरों में इमारतों के बीच फंसी यह गर्मी वेंटिलेशन न होने के कारण तापमान को बढ़ाती है।

समाधान – भुवनेश्वर का मॉडल –

प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, भारत के मध्यम आकार के शहर कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहे हैं। शहरी क्षेत्रों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 45% तेजी से बढ़ रहा है और शहर ‘अर्बन हीट आइलैंड‘ बन रहे हैं।

इसका समाधान ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर प्रदान करता है। यहां पिछले साल भारत का पहला शहर-स्तरीय इंटीग्रेटेड हीट एंड कूलिंग एक्शन प्लान (IHCAP) तैयार किया गया है। इसका विकास इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (ई-फॉरेस्ट) ने सिंगापुर-ईटीएच सेंटर के साथ मिलकर किया है। इसे भुवनेश्वर निगर निगम ने लागू किया है। इस योजना के पांच हिस्से हैं। यदि इन पांचों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो शहर की सतह के तापमान में 0.5 से 9.4 डिग्री से. तक की कमी आ सकती है। बिजली की मांग में भी 44 से 67% तक की कटौती हो सकती है।

योजना के 5 हिस्से –

1) शहर को ठंडा करना इसके तहत हरियाली का विस्तार, सूखे जल निकायों का पुनरुद्धार, ‘कूल रूफ्स‘ (सफेद छतें) को बढ़ावा देना व गर्मी के असर को कम करने वाली सडकों की डिजाइन शामिल है।

2) सख्त बिल्डिंग कोड लागू करना इसके तहत सख्त बिल्डिंग कोड लागू कर ऐसी इमारतों की डिजाइन को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जो गर्मी को कम एब्सॉर्ब करें, बिजली बचा सकें और अंदर का वातावरण ठंडा रख सकें।

3) सभी के लिए टिकाऊ कूलिंग सभी लोगों की जलवायु-अनुकूल कूलिंग समाधान (जैसे बेहतर पंखे और एसी) तक पहुंच बने। बड़े परिसरों और मॉल आदि के लिए सेंट्रलाइज कूलिंग सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए।

4) गर्मी से बचाव की क्षमता बढ़ाना शहर में ठंडे आश्रय स्थलों व ठंडे बस स्टॉप का निर्माण करना और सार्वजनिक स्थानों पर पानी के कियोस्क उपलब्ध कराना, ताकि आम लोग गर्मी से बच सके और उनकी उत्पादकता कम न हो।

5) जागरूकता अभियान चलाना गर्मी के अलर्ट के मानकों में तापमान के साथ आद्रता और रात के तापमान को भी जोड़ना। गर्मी के खतरों के प्रति जागरूकता अभियान चलाना भी इसका हिस्सा है।

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