उच्चतम न्यायालय का प्रेस की आजादी को सही ठहराना
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लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण होती है। हाल ही में पंजाब सरकार को उच्चतम न्यायालय ने इसे याद दिलाने का प्रयत्न किया है।
मामला क्या है?
पंजाब सरकार ने सरकार की आलोचना करने पर राज्य के समाचार पत्र “पंजाब केसरी” की प्रिंटिग प्रेस को बंद कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने इसे गलत बताया, और ‘अखबार की छपाई में रुकावट न डालने‘ का आदेश दिया है।
ध्यान देने वाली बात –
इस आदेश से न्यायालय ने संदेश दिया है कि मुद्दा चाहे जो भी हो, प्रेस की आजादी पर सरकार की सख्ती जनता के जानने के अधिकार में रुकावट डालती है।
2013 में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने सरकार की बुराई करने वाली रिपोर्टों पर विज्ञापन रोककर मीडिया को रोकने की घटिया कोशिशों को ‘छोटी सोच‘ कहा था।
सभी सरकारें यह जानती हैं कि सरकारों की आलोचना करना प्रेस का कानूनी अधिकार है। फिर भी प्रेस वालों को समय-समय पर धमकाया जाता है, और परेशान किया जाता है। न्यूज और जानकारी के अबाध प्रवाह को रोकने या धीमा करने की सरकारों की कोशिशें संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। ‘बिना रुकावट‘ वाली रिपोर्टिंग की शक्ति पर उच्चतम न्यायालय का आदेश सही ठहराया जा सकता है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 22 जनवरी, 2026