क्विक कॉमर्स पर सरकार के निर्देश
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हाल ही में सरकार ने फास्ट डिलीवरी या क्विक-कॉमर्स करने वाली कंपनियों से ‘दस मिनट’ डिलीवरी टाइम की सख्ती हटाने को कहा है। भले ही फास्ट डिलीवरी देश भर के लोगों को पसंद आ रही है, और वे इसे चलाए रखना चाहते हैं। लेकिन इससे सामने आ रहे नुकसान ज्यादा बड़े हैं।
कुछ बिंदु –
- 10 मिनट के वादे को पूरा करने में डिलीवरी एजेंट को तो सुरक्षा का खतरा बना ही रहता है, सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सड़क-सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।
- 10 मिनट के वादे में हुई थोड़ी भी देरी से एजेंट की रेटिंग और कमाई को नुकसान पहुँचता है।
फास्ट डिलीवरी के लाभ भी कम नहीं –
- ज्ञातव्य हो कि भारत में क्विक कॉमर्स ने ज्यादातर देशों की तुलना में बेहतर काम किया है।
- यूरोपीय शहरों में नियामकों ने वेयर हाउस को रिहायशी क्षेत्रों से बाहर की ओर रखा है। लेकिन भारत में मांग के आधार पर वस्तुओ को नजदीकी या दूर वेयर हाउस में स्टोर किया जा सकता है। इस प्रकार से भारत में यह सफल बिजनेस कहा जा सकता है।
जहाँ लोगों के पास समय की कमी है, और जो अपनी जिंदगी में रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशानियां कम करना चाहते हैं, उनके लिए यह वरदान है। ऐसे में डिलीवरी एजेंट के काम की परिस्थितियों में सुधार करके इसे चलने दिया जा सकता है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 14 जनवरी, 2026
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