विश्व आर्थिक मंच से दिया गया प्रभावी भाषण
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हाल ही में स्विट्जरलैण्ड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक संपन्न हुई है। तेजी से बदलती दुनिया के इस दौर में यह जानना जरूरी है कि विशेषकर भारत जैसी खुली अर्थव्यवस्थाओं के लिए दावोस की प्रासंगिकता कितनी उपयोगी है। टैरिफ के नए युद्ध में इस विश्व आर्थिक मंच की री-इंजिनियरिंग की जरूरत है, ताकि भारत जैसे देश इस वैश्विक मंच से अपने आप को मजबूत कर पाएं। वर्तमान बैठक से जुड़े कुछ बिंदु –
- इस बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भाषण सबसे ज्यादा याद रखने लायक क्षण बन गया। उन्होंने विश्व व्यवस्था के चरमराने के बारे में स्पष्ट बातें कहीं। उनका यह भी कहना था कि बहुपक्षीय संस्थाएं वैध नहीं रही हैं। वे बहुत पुरानी हो गई हैं।
- मंच में यह स्पष्ट हो गया कि चीन और अमेरिका जैसी बड़ी ताकतें टैरिफ को डंडा बनाकर, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट तथा कर्ज का दबाव डालकर एकीकरण का ढोंग रच रही हैं। कई देश दबदबे वाली ताकतों के साथ दो तरफा बातचीत कर रहे हैं, और रणनीतिक अधीनता को संप्रभुता समझ रहे हैं।
- कार्नी ने मूल्यों पर आधारित वास्तविकता की बात की है; ऐसे मूल्य जो संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा कर सकें तथा गठबंधन बनाने के लिए व्यावहारिक हों।
- चरमराती विश्व व्यवस्था के दौर में जी-7 के देशों ने इस मंच से दूरी बना ली है। इस मंच की उपयोगिता तभी बढ़ सकती है, जब दुनिया सामरिक सहयोग के रास्ते पर चल सके।
विभिन्न समाचार पत्रों पर आधारित। 22 जनवरी 2026
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