विमानन क्षेत्र की समस्या

Afeias
06 Jan 2026
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हाल ही में देश की मुख्य एयरलाइन इंडिगो के ठप होने से परिवहन में बड़ी बाधा पहुँची है। मामला पायलट ड्यूटी नियमों को लेकर उलझा हुआ था। फिलहाल मंत्रालय ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट पर नियमों को ठीक करके यात्रियों के पक्ष मे होने की बात कही है। इंडिगों के ऐसा करने के पीछे कारण हैं, जिनका सराकर को समाधान करना चाहिए।

कुछ बिंदु –

  • अकेले इंडिगो के पास भारत के एविएशन मार्केट का 60% से ज्यादा हिस्सा है। उसका बड़ा मार्केट शेयर ही उसे डीजीसीए पर ऐसा दबदबा बनाए रखने की छूट देता है। वहीं चीन में, मुख्य तीन एयरलाइनों का कुछ मिलाकर 60% से भी कम हिस्सा है। अमेरिका में मुख्य चार एयरलाइन के पास 75% हिस्सा है, और उनमें से कोई भी अकेले 25% तक नहीं पहुँचता है।
  • भारतीय विमानन में लगभग दो कंपनियों की 90% हिस्सेदारी है। सरकार के लिए उन्हें निर्देश देना या अनुशासन में रखना आसान नहीं है।
  • यद्यपि सरकार के प्रयास से फ्लाइट ऑपरेशन काफी ठीक हो गया है, लेकिन पायलटों ने गड़बड़ी की शिकायतें की हैं। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट को बड़ी एयरलाइन नहीं मान रही हैं। अभी भी पायलटों की भर्ती की कोशिश नहीं की गई है, और नियुक्त पायलटों से ही अधिक काम लिया जा रहा है।

विमानन क्षेत्र में नई एयरलाइनों को लाकर जब तक प्रतिस्पर्धा नहीं बढ़ाई जाती है, तब तक इस समस्या का समाधान मुश्किल है। सरकार को इसके लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

‘द टाइम्स ऑफ इंडियामें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 05 दिसंबर 2025