परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के लिए नई शुरूआत होनी चाहिए
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5 फरवरी, 2026 को ‘नई स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी या स्टार्ट‘ खत्म हो गई है। यह वैश्विक भूराजनीति के उस दौर में की गई थी, जब अमेरिका और सोवियत संघ बड़े-बड़े परमाणु हथियारों की टेस्टिंग और एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में लगे हुए थे। इस पहल ने देशों को सिखाया कि परमाणु हथियारों के असीमित भंडार में भी बातचीत से भी कमी लाई जा सकती है। इसने शीत युद्ध के आखिरी सालों की दिशा बदल दी।
स्टार्ट की शुरूआत – 1982 में इस पर बातचीत शुरू हुई थी, जो 1991 में जाकर संपन्न हुई। इसमें दो महाशक्तियों ने अपने हथियारों को घटाकर 6000 करने और उसी के अनुकूल डिलीवरी सिस्टम को कम करने पर सहमति दी थी। यह एक बड़ी सफलता थी। बाद के समझौते में इसे 1700-2200 प्रतिपक्ष कर दिया गया। न्यू स्टार्ट संधि ने 2010 में हर पक्ष को 1550 रणनीतिक हथियारों तक सीमित कर दिया।
आगे की राह – फिलहाल अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियारों को लेकर ही युद्ध छेड़ा है। उम्मीद की जा सकती है कि वह दूसरे देशों को अनुशासित करते हुए स्वयं भी सीमा में रहेगा।
अमेरिका का कहना है कि भविष्य में किसी भी हथियार नियंत्रण पहल में चीन को शामिल किया जाना चाहिए। ऐसा अनुमान है कि चीन अपने परमाणु हथियार लगातार बढ़ा रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिका भी अपनी सीमा से बाहर निकल सकता है।
स्टार्ट पहल की समय सीमा खत्म होने से परमाणु अप्रसार संधि और समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 11 फरवरी 2026