परीक्षा तंत्र की सही निगरानी की जरूरत
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परीक्षाएं लाखों युवाओं का भविष्य तय करती हैं। इसे इतना सुरक्षित बनाया जाना चाहिए कि देश में कोचिंग पर निर्भरता, रीटेस्टिंग का सिलसिला तथा प्रश्न पत्र के लीक होने जैसी घटनाएं न हों। परीक्षाओं में हुई हर गड़बड़ी उन युवाओं का भरोसा खत्म करती है, जो ‘शॉर्टकट’ का सहारा लिए बिना सही तरीके से काम करते हैं। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी या एनटीए को कई निर्देश दिए हैं –
- मंत्रालय ने सीसीटीवी सिस्टम को फिर से बनाने, कैमरों को ठीक जगह लगाने, बिना रूकावट लाइव फीड की उपलब्धता और 2026 के लिए परीक्षाओं में और कड़ी निगरानी लागू करने को कहा है।
- तकनीक का लाभ इस प्रकार से उठाया जा सके कि निरीक्षण करने वाली टीमें रियल-टाइम फुटेज आसानी से देख सकें।
- कुल मिलाकर, परीक्षाओं में होने वाली ऑपरेशनल कमियों को ठीक किया जाना चाहिए।
कोई भी परीक्षा परीक्षार्थी का आकलन करने या उसे टेस्ट करने के लिए ली जाती है। संस्थाओं का दायित्व है कि वे केवल फेल या पास करके इसे बायपास न करें। तभी डिग्रियों को सही स्थान दिया जा सकेगा।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित लेख पर आधारित। 20 नवंबर, 2025
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