मतदान केवल अधिकार या अनिवार्यता
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कुछ तथ्य –
- दो वर्ष पहले हुए लोकसभा चुनावों में लगभग 65 करोड़ भारतीयों ने मतदान किया था। उस समय भारत के कुल मतदाता 98 करोड़ थे। इसका मतलब है कि मतदान सिर्फ 66% हुआ। हर तीन पंजीकृत मतदाता में से एक ने मतदान नहीं किया।
- यही मतदान अगर 100% हो, तो हमारे लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व बेहतर हो सकता है। लेकिन उस तक पहुँचने के लिए मतदान को अनिवार्य कर देना क्या उचित है?
- हाल ही में हमारे मुख्य न्यायाधीश ने मतदान न करने वालों के लिए एक सख्त तरीके की जरूरत पर बल दिया है।
- भारत में मतदान संविधान प्रदत्त एक अधिकार है। यह कभी भी नागरिक का दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रही है। इसमें चुप रहने या मतदान न करने का विकल्प भी है।
विदशों के उदाहरण –
आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने मतदान को जरूरी कर दिया है। वहाँ मतदान न करने पर पेनल्टी भी लगती है।
भारत की स्थिति अलग –
- हमारी मुख्य समस्या यह नहीं है कि लोग मतदान नहीं करना चाहते हैं। बल्कि वे अक्सर वोट दे नहीं पाते हैं।
अतः मतदान को अनिवार्य बनाने के बजाय, भारत को मतदान में आने वाली रुकावटों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 25 फरवरी 2026