अमेरिकी टैरिफ नीति और भारत की रणनीति
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अमेरिका ने भारत समेत कई देशों से आने वाले उन उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जिनके उत्पादन में कथित रूप से जबरन श्रम का इस्तेमाल हुआ है।
संपादकीय का मुख्य तर्क है कि :
जबरन मजदूरी का तो बहाना भर है। वास्तविक उद्देश्य अमेरिका के लिए दूसरे देशों को व्यापार समझौते के लिए मजबूर करना भी हो सकता है।
तो क्या भारत को इस दबाव में आकर अमेरिका के साथ जल्दबाजी में व्यापार समझौता नहीं करना चाहिए?
कुछ बिंदु –
अमेरिका की टैरिफ रणनीति क्या है?
अमेरिका की नीति को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है :
- पहला — टैरिफ के माध्यम से व्यापारिक समझौता करने की नीति। अमेरिका टैरिफ को केवल संरक्षणवादी उपाय के रूप में नहीं, बल्कि सौदेबाजी में अपने लाभ के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
- दूसरा — समान नियमों की जगह भेदभावपूर्ण व्यवहार। यदि जबरन श्रम ही वास्तविक चिंता होती, तो सभी ऐसे देशों पर समान कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन अलग-अलग देशों को अलग-अलग टैरिफ ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि व्यापार समझौते और भू-राजनीतिक स्थितियाँ भी टैरिफ नीति को प्रभावित कर रही हैं।
- तीसरा — नीति की अनिश्चितता। सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि अमेरिका की टैरिफ नीति तेजी से बदल सकती है। इसलिए आज किसी ट्रेड डील में मिलने वाली टैरिफ रियायत भविष्य में भी बनी रहेगी, इसकी कोई पूर्ण गारंटी नहीं है।
भारत के लिए मुख्य चिंता –
- भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी समस्या केवल 10% टैरिफ नहीं, बल्कि अनिश्चितता है।
- भारत को टैरिफ दबाव के कारण जल्दबाजी में ट्रेड डील नहीं करनी चाहिए। व्यापार समझौता दीर्घकालिक प्रतिबद्धता होती है। इसलिए केवल तत्काल टैरिफ राहत के लिए ऐसा समझौता नहीं होना चाहिए, जिसमें भारत अपने घरेलू बाजार को अत्यधिक खोल दे, संवेदनशील क्षेत्रों में रियायतें दे, नीति स्वायत्तता कम करे, या भविष्य की औद्योगिक नीति सीमित कर बैठे।
- तीसरे देश से ट्रेड पर दंड – यह संप्रभुता का एक महत्वपूर्ण मामला है। यदि भारत स्वयं जबरन श्रम का उपयोग नहीं कर रहा है, लेकिन किसी तीसरे देश से जुड़े उत्पादों के जबरन श्रम के मामले के कारण भारतीय निर्यात पर कर लगाया जा सकता है।
भारत ने क्या सही किया?
- भारत ने प्रस्तावित 12.5% कर को 10% तक सीमित कराने में सफलता हासिल की।
- इसके अलावा भारत ने जबरन श्रम से विनिर्मित उत्पाद के आयात पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की।
धारा 301 का महत्व –
धारा 301 अमेरिकी व्यापार कानून के तहत ऐसा तंत्र है, जिसके माध्यम से अमेरिका किसी देश की व्यापारिक डील को गलत या भेदभावपूर्ण मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
भारत को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
- डील एट एनी कॉस्ट नीति से बचना – भारत को कर कम कराने के बदले असंगत रियायतें नहीं देनी चाहिए।
- भारत को अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करनी चाहिए और ईयू, आसियान, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाना चाहिए।
- विश्व व्यापार मंच को मजबूत करना।
- निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखना।
- चीन प्लस वन का लाभ
यदि अमेरिकी और पश्चिमी कंपनियाँ चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं, तो भारत को वैकल्पिक विनिर्माण हब के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करना होगा।
‘द हिंदू‘ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 28/07/26