आवंटित सरकारी निधि का समय पर खर्च न होना
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वर्तमान वित्त वर्ष में सरकार को 70 हजार करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इसका कारण मंत्रालयों और प्रमुख कल्याण कार्यक्रमों में दिए गए बजट का कम उपयोग होना है। जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की गति धीमी होने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। इसका लाभ यह होगा कि सब्सिडी की लागत और कर-संग्रहण में मामूली कमी को पूरा करने के लिए सरकार को वित्तीय सहूलियत मिल जाएगी।
चुनौतियाँ बनी हुई हैं –
- अलग-अलग मंचों पर तकनीकी समावेशन की समस्या।
- कई स्तरीय अनुमोदन।
- राज्य और जिला स्तर पर प्रशासनिक अक्षमता।
- ऑडिट से जुड़े रिस्क से बचना।
- केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और लागू करने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से समय पर पूरा खर्च नहीं हो पाता है।
ऐसी देरी की मैक्रोइकोनॉमिक लागत बहुत ज्यादा होती है। खर्च न हुए फंड से पानी, आवास और ग्रामीण विकास के अनेक काम हो सकते हैं।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 29 जनवरी, 2026
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