आवंटित निधि के संपूर्ण उपयोग से ही कल्याण संभव
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हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के नए डेटा से पता चलता है कि 2024-25 में अनुसूचित जातियों के लिए आवंटित लगभग 25% धन का उपयोग नहीं किया गया है। यह धन विकास कार्य योजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा अनुसूचित जातियों के कल्याण में काम आना था।
क्या किया जाना चाहिए –
- उन तरीकों का पुनर्मल्यांकन किया जाए, जिनसे निधियों का अधिकतम प्रभाव के लिए उपयोग किया जा सके।
- सरकार के 39 मंत्रालयों और विभागों को कुल व्यय का 2-20% अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण के लिए निर्धारित करना आवश्यक है। इस धन को अनुदान, अंशदान या गारंटी के रूप में माना जा सकता है।
- निर्धारित राशि का उपयोग सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा विकसित कार्यक्रमों और योजनाओं को आर्थिक गतिशीलता देने के लिए किया जाना चाहिए।
- ये योजनाएं इस समुदाय द्वारा चलाए जाने वाले नई व्यावसायिक शिक्षा अनुदान एवं स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को लेकर हो सकती हैं।
इससे दोहराव कम होगा, लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी और कार्यक्रम वितरण का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 30 अप्रैल, 2025
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