जल जीवन मिशन 1.0 व जल जीवन मिशन 2.0
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस सप्ताह जल जीवन मिशन के पुनर्गठन और इसे 2028 तक आगे बढ़ाने की योजना को मंजूरी प्रदान की। 2019 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप से पानी पहुँचाने की पहल से नल-जल कवरेज 3.23 करोड़ से 15.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक पहुँच गया है, जो ग्रामीण घरों का 81% हिस्सा है।
- दूसरे चरण जेजेएम 2.0 में 8.69 लाख करोड़ का परिव्यय किया जाएगा। इससे कवरेज और बढ़ेगा।
- जल जीवन मिशन 2.0 किस प्रकार जेजेएम-1.0 से अलग है?
- इसको नए तरीके से तैयार किया गया है, जो इसे नागरिक-केंद्रित एवं उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण कार्यक्रम बनाता है।
- ‘सुजलाम भारत’ नामक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढ़ाँचा भी प्रस्तावित है, जो प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट सेवा क्षेत्र पहचान दस्तावेज या आईडी प्रदान करेगा और पूरी पेयजल आपूर्ति श्रंखला को स्रोत से लेकर नल तक निर्धारित करेगा।
- पर्याप्त ग्राम स्तरीय संचालन और रखरखाव तंत्र के लिए गॉव की जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
- ‘जल उत्सव’ जैसी पहलों के माध्यम से सामुदायिक भावना और जल प्रणालियों की समीक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा।
जल जीवन मिशन- प्रथम की कमियाँ –
- इसकी सेवाएँ अधिक टिकाऊ नहीं थी। कई गाँव अब भी अनियमित जल आपूर्ति, सीमित उपचार क्षमता या खराब अधोसंरचना का सामना कर रहे हैं।
- इस मिशन की संचालन और अधोसंरचना अब भी स्थानीय संस्थाओं की तकनीकि क्षमता और वित्तीय संसाधनों पर काफी निर्भर है।
- 2026-27 के बजट में इस मिशन के लिए 67000 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए; जो पिछले वर्ष के बराबर थे, पर वास्तविक खर्च, जो 2024-25 में 22,615 करोड था, वह अनुमानतः 17000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। क्रियान्वयन में बाधाएँ, खरीद में देरी और क्षमता की सीमाएँ आवंटित धन के उपयोग की गति को धीमा कर रही हैं।
जल से जुड़ी मूलभूत समस्याएँ –
- कई क्षेत्रों में गिरता भूजल स्तर और बिगड़ती जल गुणवत्ता बड़ी समस्या है। भूजल ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जल का मुख्य स्रोत है।
- ग्रामीण भारत में पेयजल की मांग का 85% से अधिक और सिंचाई की मांग का 60% से अधिक भूजल स्रोतों से पूरा होता है।
जलसंग्रहण, जल ग्रहण क्षेत्र विकास, वर्षा जल संचयन और वैकल्पिक सतही जल स्रोतों में निवेश द्वारा दीर्घकालिक जल सुरक्षा को प्रबंधित करना चाहिए।