प्रगति प्लेटफार्म की उपयोगिता तथा भविष्य के लिए कुछ उपाय
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प्रगति (प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) – प्लेटफार्म ने परियोजना निगरानी, अंतर-मंत्रालयीन; केंद्र-राज्य समन्वय तथा मुद्दों के समाधान को डिजिटल रूप से एकीकृत करके रुकी हुई अधोसंरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की है।
- 2015 से अब तक प्रगति ने 85 लाख करोड़ रुपये की 3300 विलंबित परियोजनाओं में मदद की है। यह स्वतंत्र समीक्षा प्लेटफार्म के रूप में काम नहीं करता है, बल्कि पीएम गति शक्ति, परिवेश (प्रोएक्टिव एंड रिस्पांसिव फैसिलिटेशन बाय इंटरेक्टिव एंड वर्चुअल एनवायरमेंटल सिंगल विंडो हब) तथा प्रीएमजी (प्रोजेक्ट मानिटरिंग ग्रुप) के साथ समन्वय से काम करता है।
- ये प्लेटफार्म प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रत्यक्ष निगरानी के साथ बाधाओं को कम करता है तथा कागज आधारित प्रक्रियाओं को एक से अधिक एकीकृत और समयबद्ध प्रणाली की ओर ले जाने में सहायक रहा है।
परियोजनाओं में विलंब के कारण –
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार की फंडिंग वाली परियोजनाओं की लागत 22.2% तक बढ़ चुकी है।
- इस अतिरिक्त सार्वजनिक व्यय से लेखा संबंधी समस्याओं के साथ-साथ सार्वजनिक पूँजी, आर्थिक लाभ व विकास संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
- 35% अधोसंरचना निर्माण में विलंब का कारण भूमि अधिग्रहण में उत्पन्न समस्या है।
- 20% संरचना निर्माण में विलंब का कारण पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ न मिलना है।
- जमीन के अधिकार संबंधी मुद्दों, उपयोगिताओं का स्थानांतरण और अंतर मंत्रालयीन विवाद भी समस्या को बढ़ाते हैं।
आगे की राह –
प्रगति द्वारा वास्तविक समय के आंकडे़ इकठ्टा किए जाते हैं, ड्रोन से ली गई तस्वीरें और वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से संयोजन किया जाता है।
- इसको निगरानी व समीक्षा से आगे एक संस्थागत रूप देना चाहिए, जिससे तेज निर्णय निर्धारण एक नियमित प्रक्रिया बन सके। इसके लिए गहन राज्य स्वामित्व, जिला और विभागीय स्तरों पर मजबूत डिजिटल क्षमता और अनुमोदनों का सतत अनुक्रम आवश्यक है।
- पर्यावरणीय स्वीकृतियों, इसकी रूपरेखा तथा योजना के परिणामों की ट्रैकिंग से वास्तविक परिणामों के आकलन तक विस्तारित करना चाहिए।
- अधोसंरचना के निर्माण तथा रखरखाव के लिए स्थानीय क्रियान्वयन एजेंसियों के पास पर्याप्त वित्तीय समर्थन और क्षमता होना आवश्यक है।
सरकार द्वारा व्यय किए जाने वाले उच्च पूँजीगत व्यय से लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि परियोजनाओं में विलंब न हो, क्योंकि विलंब होने से ऋण लेना पड़ता है तथा कई तरीकों से कुल लागत बढ़ जाती है।