भारत के परमाणु ऊर्जा सुधार

Afeias
13 Jan 2026
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हाल ही में लोकसभा में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया विधेयक 2025 पारित किया गया है।

इससे जुड़ी कुछ मुख्य बातें –

  • यह सुधार 2008 से रुका हुआ था। इसके साथ ही भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता या 123 समझौता आगे बढ़ा है।
  • 2008 में हुआ यह समझौता एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौता है, जो भारत को परमाणु अप्रसार संधि के बाहर रखते हुए भी अमेरिका और अन्य देशों से परमाणु ईंधन, प्रौद्योगिकी और रिएक्टरों की आपूर्ति की अनुमति देता है।
  • इस सुधार से नयी परमाणु ऊर्जा योजनाओं में निजी भागीदारी भी इक्विटी ले सकेंगे।
  • विदेशी कंपनियां और ग्लोबल सॉवरेन वेल्थ फंड्स निवेश कर सकेंगे।
  • ऐसा होने से हमारे पूरे ऊर्जा क्षेत्र को स्वच्छ और हरित या ‘ग्रीन‘ बनाने के लिए आवश्यक पूंजी मिल सकेगी।

आगे की राह –

  • समझौते के बाद ब्लूप्रिंट में सरकार को इसके कार्यान्वयन के बारे में एक रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिससे ऊर्जा के प्रस्तावित विकार्बनीकरण के बारे में स्पष्टता मिल सके। इससे निवेशकों को स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी। (ज्ञातव्य हो कि भारत ने 2070 तक विकार्बनीकरण के नेट जीरो का लक्ष्य रखा है)।

स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन के लिए उठाया गया नियोजित कदम ही ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रख सकता है।

‘द इकॉनॉमिक टाइम्समें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 18 दिसंबर, 2025